नवाचार : छुट्टी के दिन कोर्ट कर्मचारियों के विवादों का त्वरित समाधान

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की दूरदर्शी पहल ने न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय स्थापित किया है। जिला न्यायपालिका और उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के सेवा-संबंधी विवादों को बिना अनावश्यक विलंब के आपसी सहमति से निपटाने के उद्देश्य से मध्यस्थता प्रक्रिया का शुभारंभ किया गया है। इस अभिनव अभियान के सफल संचालन की जिम्मेदारी प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक रूसिया तथा न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल को सौंपी गई है।

नियमित न्यायिक कार्यों को किसी भी प्रकार से बाधित किए बिना इस पहल की प्रभावशीलता प्रदर्शित करते हुए सार्वजनिक अवकाश वाले शनिवार, 21 फरवरी को उच्च न्यायालय परिसर के साउथ हॉल में एक विशेष मध्यस्थता सत्र का आयोजन किया गया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न इस सत्र में कुल 43 प्रकरण प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 25 मामलों का संवाद एवं सहमति के आधार पर तत्काल निराकरण किया गया। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जिसने कर्मचारियों के मध्य विश्वास और सौहार्द को और अधिक सुदृढ़ किया है।

आज आयोजित मध्यस्थता सत्र की विशेषता यह रही कि इसमें न केवल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की, बल्कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ कर्मचारियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावी रूप से भाग लिया।

मध्यस्थता की इस तकनीक सक्षम एवं समकालीन व्यवस्था ने भौगोलिक दूरी की बाधाओं को समाप्त करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के प्रकरणों का त्वरित, पारदर्शी और परिणाममुखी निराकरण सुनिश्चित किया। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि वर्ष 2005 एवं 2010 से लंबित प्रकरणों का भी सफलतापूर्वक निराकरण किया गया, जिससे दीर्घकाल से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई। यह पहल समयबद्व, प्रभावी एवं उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था की प्रतिबद्वता को भी रेखांकित करती है।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने कहा कि मुख्य न्यायमूर्ति के मार्गदर्शन में ऐसे मध्यस्थता सत्र भविष्य में नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे। इससे कर्मचारियों को त्वरित एवं किफायती न्याय उपलब्ध होगा तथा यह प्रक्रिया सुलभ, व्यावहारिक और प्रभावी न्याय प्रणाली की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध होगी।

यह प्रेरणादायी और अभूतपूर्व पहल न्यायिक संस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देती है। वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को सुदृढ़ करते हुए यह न केवल समय और संसाधनों की बचत सुनिश्चित करेगी, बल्कि न्याय व्यवस्था की दक्षता और विश्वसनीयता में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगी-एक ऐसा कदम जो पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।

इस अवसर पर रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह राठौड़ सहित अन्य रजिस्ट्रारगण उपस्थित रहे। साथ ही हाई कोर्ट पैनल के वरिष्ठ अधिवक्तागण आदित्य अधिकारी, अनूप नायर, बी.एन. मिश्रा, श्रीमती अमृत रूपराह, आकाश चौधरी, सिद्वार्थ सेठ, के.एन. फखरुद्दीन, संदीप के. शुक्ला, राजेन्द्र सेन, पराग तिवारी, मिहिर अग्रवाल, संपत कुशवाहा, श्रीमती नीलम गोयल, अभिषेक अर्जारिया, श्रीमती अंजली पटेल. विवेकानंद अवस्थी एवं राहुल चौबे ने उपस्थिति रहकर सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

Next Post

सुनियोजित तरीके से रीवा में विकास के कार्य किए जा रहे हैं: उप मुख्यमंत्री

Sat Feb 21 , 2026
रीवा। उप मुख्यमंत्री राजेनद्र शुक्ल ने कहा कि रीवा में विकास के कार्य सुनियोजित तरीके से कराए जा रहे हैं. रीवा अलग तरीके से विकसित हो रहा है. आने वाली पीढ़ी को एक ऐसे रीवा की सौगात दिए जाने के प्रयास हैं जहाँ सभी आवश्यकताओं की पूर्ति हो तथा उन्हें […]

You May Like