
गुना। म्याना क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता और बदहाली का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक तरफ जहां सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे करती है, वहीं म्याना उप स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला मरीज को समय पर न तो डॉक्टर मिले और न ही एंबुलेंस। स्थिति यह बनी कि परिजनों का सरकारी सिस्टम से भरोसा ही उठ गया और उन्हें निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ी।
जानकारी सामने आई है कि म्याना निवासी मीना कुशवाह पति देवेंद्र कुशवाह अपनी ननद की शादी के बाद विदाई समारोह में शामिल थीं। विदाई के भावुक क्षणों में रोते-रोते मीना अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें सुबह करीब 7 बजे म्याना उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन वहां का नजारा देख परिजन दंग रह गए। आरोप है कि आपातकालीन स्थिति में भी अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। वहां मौजूद एक नर्स और एक कंपाउंडर ने मरीज की गंभीर हालत को तवज्जो नहीं दी। महिला के परिजन लखनलाल कुशवाह ने बताया कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी डॉक्टर को नहीं बुलाया गया और न ही प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। जब परिजनों ने गंभीर हालत को देखते हुए महिला को गुना रेफर करने की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए। प्रबंधन का कहना था कि एंबुलेंस गुना से बुलानी पड़ेगी, जिसमें काफी समय लग सकता था। मरीज की जान खतरे में देख परिजनों ने समय गंवाना उचित नहीं समझा और निजी वाहन का इंतजाम कर उन्हें गुना ले गए। स्वास्थ्य केंद्र की इस लापरवाही से परिजन इतने आहत हुए कि उन्होंने गुना पहुंचने के बाद भी गुना जिला अस्पताल) न जाकर एक निजी अस्पताल में मीना को भर्ती कराया। परिजनों का कहना है कि जब म्याना जैसे केंद्रों पर यह हाल है, तो सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कैसे किया जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने क्षेत्रीय बमौरी विधायक को भी फोन पर पूरी स्थिति से अवगत करा दिया है। परिजनों ने ब्लॉक मेडिकल आॅफिसर पर सीधा निशाना साधा है। उनका आरोप है कि बीएमओ का स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई नियंत्रण नहीं है और उनकी लापरवाही के कारण ही आम जनता को इस तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
