
ग्वालियर। वर्तमान में सच्चे मित्र मिलना दुर्लभ है, जग में मित्रता हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी। सुदामा के चरणों का कांटा भगवान ने अपने मुख से निकाला। वर्तमान युग में ऐसा कौन है जो मित्र के दुःख को बांटने के लिए अपने सुख छोड़ दे। ये विचार बड़ोरी स्थित संकटेश्वर महादेव मंदिर में अन्नाना परिवार की ओर से सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के अंतिम दिन व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए आचार्य दिनेश शास्त्री महाराज ने कहीं।
आचार्य दिनेश शास्त्री ने कहा कि अपने छोटे से जीवन में प्राणी को परमात्मा से रिश्ता जरूर बनाना चाहिए, क्योंकि परमात्मा से ही बना रिश्ता प्राणी को मोक्ष की तरफ ले जाएगा। साथ ही उसके जीवन में आने वाले सभी कष्ट भी आसानी से दूर हो जाएंगे।
सातवें दिन सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन किया गया। महाआरती के साथ कथा का विश्राम हुआ। कथा वाचक ने सुदामा चरित्र प्रसंग सुनाते हुए मित्रता की परिभाषा समझाते हुए कहा कि सच्चा मित्र वहीं है जो हर दुःख-सुख में साथ रहे। कथा में जब सजीव झांकियों के माध्यम से दरिद्र सुदामा के द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण से मिलने आने, भगवान के स्वयं उसे लेने द्वार पर जाने और भगवान कृष्ण द्वारा जल की बजाय आसूंओं से सुदामा के चरण धोने का प्रसंग साकार हुआ तो माहौल भावनापूर्ण हो गया और कृष्ण-सुदामा के जयकारे गूंज उठे। इस दौरान अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो दर पर सुदामा गरीब आ गया है, चावल की पोटली लेकर आए मोहन के द्वार जैसे भजनों ने भी माहौल भावमय कर दिया।
कथा की आरती में पटिया वाले बाबा करह धाम, परीक्षित साहब सिंह- श्रीमती गुड्डी देवी, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, हरनाम सिंह सरपंच, विशाल सिंह लम्बरदार, कल्याण सिंह, राजेन्द्र सिंह, महेंद्र सिंह, पंजाब सिंह, जय सिंह, राजवीर सिंह, वीरेंद्र सिंह, देवेंद्र, सिंह, गिर्राज सिंह सहित सैकड़ों भक्त गण शामिल रहे।
