नैनीताल | उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार के प्रसिद्ध चंडी देवी मंदिर के मुख्य पुजारी के खिलाफ लगे लिव-इन रिलेशनशिप और आपराधिक आरोपों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने सुनवाई के दौरान चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिरों और आश्रमों के प्रबंधन से जुड़े व्यक्तियों का विवादों में घिरना धार्मिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि अगर धर्मस्थलों के पदाधिकारी ही घरेलू विवादों और छेड़छाड़ जैसे आरोपों का सामना करेंगे, तो समाज में क्या संदेश जाएगा। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे जैसी पवित्र जगहों को ऐसी गतिविधियों से मुक्त रहना चाहिए।
यह पूरा मामला महंत की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सुर्खियों में आया है। पत्नी का आरोप है कि उनके पति के एक अन्य महिला के साथ करीबी संबंध थे, जिससे उनकी एक बेटी भी हुई है। शिकायत के अनुसार, पत्नी को महंत की एक निजी डायरी मिली थी, जिसमें उक्त महिला के नाम पर साढ़े पांच लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का जिक्र था। इतना ही नहीं, यह भी सामने आया कि मई 2025 में महंत को पंजाब पुलिस ने छेड़छाड़ के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था। इन खुलासों ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और महंत के नैतिक आचरण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे मंदिरों और आश्रमों की प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी के लिए समय-समय पर औचक निरीक्षण करें। न्यायालय ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को भी संबंधित ट्रस्ट के कामकाज पर पैनी नजर रखने को कहा है। कोर्ट ने साफ किया कि धार्मिक संपत्तियों और पदों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस आदेश के बाद अब उत्तराखंड के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के प्रबंधन ढांचे में बड़े बदलाव और प्रशासनिक सख्ती की उम्मीद की जा रही है, ताकि उनकी पवित्रता बनी रहे।

