
इंदौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने आय से अधिक संपत्ति के प्रकरण में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने से इंकार कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया अपराध संबंधी सामग्री उपलब्ध होने पर जांच प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता.
लोकायुक्त की अधिकृत जानकारी के अनुसार आरोपी भूपेंद्रसिंह भाटी ने एफआईआर निरस्त कराने के लिए एमसीआरसी दायर की थी. याचिका में विभिन्न आधारों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरण को रद्द करने की मांग की गई थी. आवेदक ने गणना संबंधी त्रुटियों का हवाला भी दिया था. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की द्वैधपीठ ने की. पीठ ने कहा कि एफआईआर निरस्तीकरण की कार्यवाही में साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जा सकता और इसे ‘मिनी ट्रायल’ का रूप नहीं दिया जा सकता. लोकायुक्त पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि ताजा जांच में अनुपातहीन संपत्ति पाए जाने के तथ्य सामने आए हैं. इस पर न्यायालय ने जांच एवं अभियोजन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी. प्रकरण में लोकायुक्त इंदौर संभाग के पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय, अनुसंधानकर्ता अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान तथा विभाग की ओर से स्थायी अधिवक्ता प्रसन्ना प्रसाद ने पक्ष रखा. अदालत ने प्रस्तुत तथ्यों से सहमति व्यक्त करते हुए याचिका निरस्त कर दी.
