
छतरपुर। कहते हैं, जहां हौसलों की उड़ान होती है, वहां बेटियां आसमान छू जाती हैं। बुंदेलखंड की धरती एक बार फिर इस बात की गवाह बनी है। यहां की बेटियां अब सिर्फ घर की चौखट तक सीमित नहीं, बल्कि देश-दुनिया में अपनी पहचान बना रही हैं।
हाल ही में छतरपुर की प्रतिभाशाली खिलाड़ी क्रांति गौड ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाकर जिले का मान बढ़ाया। अब उसी कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है—18 वर्षीय चंद्रकला कुशवाहा। किसान परिवार से आने वाली चंद्रकला ने साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे संसाधनों की कमी भी छोटी पड़ जाती है।
छतरपुर शहर के वार्ड क्रमांक 8 की रहने वाली चंद्रकला ने वाटर स्पोर्ट्स में 20 पदक जीतकर सबको चौंका दिया है। इनमें 9 राज्य स्तरीय, 10 राष्ट्रीय और 1 अंतरराष्ट्रीय पदक शामिल हैं। नवंबर 2025 में उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी लेक में आयोजित इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस प्रतियोगिता में 20 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
चंद्रकला बताती हैं कि बचपन से ही खेलों के प्रति लगाव था। शूटिंग में उम्र कम होने से मौका हाथ से निकल गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। मलखंभ से शुरुआत की, अभ्यास के लिए घर की छत पर रस्सी बांधकर पसीना बहाया और कोरोना काल में भी तैयारी जारी रखी। यही जिद और जुनून उन्हें कैनोइंग, कयाकिंग और वाटर स्कीइंग जैसे खेलों तक ले गया।
आज चंद्रकला की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का जवाब है जो बेटियों की क्षमता पर सवाल उठाती है। बुंदेलखंड की यह बेटी बता रही है कि अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल दूर नहीं होती।
