बहादुरपुर : ग्राम पंचायत बहादुरपुर में पंचायत भवन के स्वामित्व से संबंधित स्पष्ट रिकॉर्ड न होने के कारण बेशकीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों का जाल बिछता जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि जिस भूमि का बाजार मूल्य करोड़ों में है, उसे बचाने के लिए पंचायत के पास कोर्ट में पेश करने के लिए पुख्ता दस्तावेज तक नहीं हैं।
सर्वे नंबर 162 में दर्ज है भवन, पर सीमाएं लापताः
शासकीय रिकॉर्ड के अनुसार, बहादुरपुर का पंचायत भवन सर्वे नंबर 162 की आबादी भूमि पर स्थित है। राजस्व अभिलेखों के बारहखाने में भी पंचायत भवन का उल्लेख है। किंतु विडंबना यह है कि ग्राम पंचायत के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि भवन के लिए वास्तव में कितनी जमीन आवंटित की गई थी। इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर आस-पास के
माफियाओं ने पंचायत भवन को चारों ओर से घेर लिया है।
5000 वर्गफुट जमीन पर अवैध कब्जा, 2.50 करोड़ का नुकसानः स्थानीय अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में करीब 5000 वर्गफुट भूमि अवैध कब्जे की चपेट में है। इस क्षेत्र में भूमि का बाजार मूल्य लगभग 5000 रुपये प्रति वर्गफुट है। इस लिहाज से देखा जाए तो करीब 2.50 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति पर निजी लोगों ने अपना आधिपत्य जमा लिया है।
न्यायालय में कमजोर पड़ रहा पंचायत का पक्षः
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में एक-दो बार अवैध कब्जों के विरुद्ध तहसील न्यायालय में प्रकरण भी चले। लेकिन हर बार पंचायत प्रशासन को मुंह की खानी पड़ी, क्योंकि उनके पास भूमि की सीमाओं और आवंटन से जुड़ा कोई वैधानिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। साक्ष्यों के अभाव में अतिक्रमणकारियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। जनपद पंचायत मुंगावली में बहादुरपुर के सदस्य आदित्य त्रिवेदी का कहना था कि
जब तक पंचायत के पास स्पष्ट सीमांकन और आवंटन पत्र नहीं होगा, तब तक इस बेशकीमती जमीन को बचाना नामुमकिन है। यह सीधे तौर पर सार्वजनिक संपत्ति की चोरी है।
भू स्वामित्व में भी दर्ज नहीं अतिक्रमण कारियों के नामः
करीब एक वर्ष पहले राजस्व विभाग द्वारा आबादी की जमीनों पर मालिकाना हक देने के लिए ड्रोन से सर्वे किया था। इस सर्वे के फाइनल होने के बाद सामने आया है कि ग्राम पंचायत से लगे हुए जो मकान दुकान हैं, वह शासकीय भूमि में हैं, क्योंकि उन्हें इस सर्वे में भू स्वामित्व नहीं दिया। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और राजस्व विभाग इस मामले में संज्ञान लेकर रिकॉर्ड दुरुस्त कराता है, या फिर बहादुरपुर पंचायत भवन महज एक छोटे से ढांचे में सिमट कर रह जाएगा। इस संबंध में जब जनपद पंचायत मुंगावली के सीईओ आलोक इटोरिया से बात करनी चाही तो वह वीडियो कॉन्फ्रेस की बैठक में व्यस्त थे,जिसकी वजह से बात नहीं हो सकी।
