देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की हुई सराहना

चित्रकूट, /सतना:महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित पंच दिवसीय ग्रामोदय महोत्सव का भव्य समापन आज विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में देशप्रेम एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन रहे, जबकि समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने की।

इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. रमेशचंद्र त्रिपाठी, ग्रामोदय महोत्सव के मुख्य संयोजक प्रो. नन्दलाल मिश्रा, सह संयोजक प्रो. ललित कुमार सिंह, पूर्व कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्रा एवं प्रो. भरत मिश्रा सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता—प्रो. डी.पी. राय (कृषि), प्रो. अमरजीत सिंह (प्रबंधन), प्रो. एस.के. चतुर्वेदी (विज्ञान), प्रो. आंजनेय पांडेय (प्रबंधन), प्रो एन एल मिश्रा (कला) एवं अन्य शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं कुलगुरु द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। स्वागत-सम्मान उपरांत मुख्य संयोजक प्रो. नन्दलाल मिश्रा ने पांच दिवसीय महोत्सव का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें विविध बौद्धिक, सांस्कृतिक, ललित कला एवं खेल गतिविधियों का उल्लेख किया गया।

अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि अभय महाजन ने कहा कि श्रद्धेय राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख, चित्रकूट और ग्रामोदय विश्वविद्यालय एक-दूसरे के पर्याय हैं। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष की आयु में नानाजी ने चित्रकूट आकर ग्रामोदय विश्वविद्यालय की जो संकल्पना साकार की, वह आज सतत विकास का आदर्श उदाहरण बन चुकी है। नानाजी सर्वांगीण विकास के प्रबल पक्षधर थे और ग्रामोदय महोत्सव में उसी भावना के अनुरूप विविध कार्यक्रमों का चयन किया गया।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे नानाजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। नानाजी का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण था। उन्होंने दधीचि देहदान समिति की स्थापना करवाई और स्वयं भी देहदान का संकल्प लिया। श्री महाजन ने युवाओं से आग्रह किया कि वे आत्मविकास के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए भी चिंतन एवं प्रयास करें।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिभागियों का प्रदर्शन अत्यंत उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय रहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में तकनीकी संसाधनों एवं सहयोगी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की प्रतिभा को और व्यापक मंच मिल सके।
उन्होंने कहा कि ग्रामोदय विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं केवल शैक्षणिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि बौद्धिक, सांस्कृतिक, ललित कला और खेलकूद के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। देश-विदेश में विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां संस्थान की प्रतिष्ठा को निरंतर बढ़ा रही हैं।
समापन समारोह में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। देवी भावनृत्य, युगल नृत्य, परब आदिवासी नृत्य, असभानिया नृत्य, समूहगान, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एवं ‘महाभारत’ नृत्य-नाटिका, छठी मैया पूजा नृत्य, उड़िया एवं सम्भलपुरी नृत्य, पंथी नृत्य, राई (बुंदेलखंड) नृत्य, ‘भारत अवलोकन’ एवं इंडियन नेशनल एंसेंबल सहित विविध प्रस्तुतियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता एवं एकता का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया।
इन प्रस्तुतियों में स्वरजिका पंडा, दीपन्नीता, मान्या सिंह, अंकिता एवं साथी, भारती सिंह एवं साथी, ज्योति पटेल एवं साथी, आराधना एवं समूह, उज्ज्वला कुमारी एवं साथी, राशिका एवं समूह, कनकवर्धन , अंकिता सेन एवं समूह, ईशू सिंह, स्तुति मिश्रा, जसस्विनी, निवेदिता वर्मा, प्रियांशु ताम्रकार, यामिनी तुरकर सहित विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संयोजन डॉ विवेक फड़नीस और प्रभावी संचालन यामिनी तुरकर (बी. ए.बी.एड. ) द्वारा किया गया। अंत में कुलसचिव प्रो. रमेशचंद्र त्रिपाठी ने आभार प्रदर्शन किया। सामूहिक वंदे मातरम् – राष्ट्रगान एवं समापन घोषणा के साथ पंच दिवसीय ग्रामोदय महोत्सव का सफल समापन हुआ।

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