विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
ऊर्जाधानी में सिस्टम को लेकर मंच से जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूटा. स्कूल, अस्पताल, आंगनवाडी जैसे मुद्दो को लेकर अफसरो को कटघरे में खड़ा करते हुए अपनी ही सरकार के सिस्टम पर हमला किया. नीति आयोग के संपूर्णता अभियान 2.0 की औपचारिक शुरुआत जिस सरकारी मंच से विकास के दावे गिनाने के लिए की गई थी, वही मंच अटल बिहारी सामुदायिक भवन बिलौंजी में सरकारी सिस्टम की पोल खोलने का अखाड़ा बन गया. देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम ने सैकड़ों लोगों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अपनी ही सरकार के तंत्र पर तीखा हमला बोला. विधायक ने दो टूक कहा कि सरकारी फाइलों में जो विकास दिखाया जा रहा है, वह जमीनी हकीकत से कोसों दूर है. शिक्षा व्यवस्था को यहां कटघरे में खड़ा करते हुए कागजो में बच्चो का भविष्य सवारने की बात कही. वही स्वास्थ्य व्यवस्था पर माननीय विधायक के शब्द और भी तीखे थे. समुचित इलाज के नाम पर केवल योजनाओं का आकड़ा पेश किया जाता है. जिस समय विधायक बेबाक तरीके से सिस्टम की पोल खोल रहे थे उस समय मंच पर मौजूद अधिकारी असहज दिखाई दिये और जनता-जनार्दन ने तालियां बजाकर विधायक जी के बयान का समर्थन किया. तालियों की गूंज सिस्टम के प्रति जनता की नाराजगी की आवाज थी. अब सवाल यह उठता है कि जब सब कुछ ठीक चल रहा है तो फिर सत्तारूढ़ दल के विधायक को सार्वजनिक मंच से अपने ही प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने की जरूरत क्यो पड़ी? विधायक द्वारा उठाए गए ये मुद्दे सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि सिस्टम के लिए चेतावनी हैं. यदि अब भी कागजी प्रगति के सहारे काम चलता रहा, तो योजनाएँ केवल मंचों और रिपोर्टों तक ही सीमित रह जाएंगी. जनता अब जवाब चाहती है और वह भी जमीन पर दिखने वाला.
पूर्व विधायक का कांग्रेस से मोह भंग
मऊगंज के पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी का कांग्रेस से दो साल के पहले ही मोह भंग हो गया. वर्ष अप्रैल 2024 को कांग्रेस पार्टी का दामन थामा था और अब पार्टी के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाने के साथ प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. तिवारी ने सवर्ण समाज पार्टी की स्थापना कर राजनीति में कदम रखा था और कई बार चुनाव लड़े, हारते रहे. जनशक्ति पार्टी में जाने के बाद मऊगंज से विधायक चुने गए फिर भाजपा में शामिल हुए. उसके बाद भाजपा को छोड़ कर वर्ष 2023 में सपा से टिकट लेकर सिरमौर से चुनाव के मैदान में उतरे, जमानत जप्त हुई फिर कांग्रेस में शामिल हो गये और अब कांग्रेस को भी टाटा कर दिया. दरअसल मऊगंज में एक कार्यक्रम के दौरान तिवारी ने यहा के पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना का नाम लिये बिना ही निशाना साधा था. जिसके बाद नोटिस जारी हुई और यही से मनमुटाव शुरू हुआ, नोटिस से आहत चल रहे तिवारी ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सहित नेताओं पर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया. अब आगे किस दल का दामन थामेगें, यह तो वह खुद जाने.
कांग्रेस दिखाएगी संगठन की ताकत
नगरीय निकाय चुनाव के पहले कांग्रेस बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत कर अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में है. आम जनता तक कैसे पहुंचे और लोगो को पार्टी संगठन से जोडऩे के लिये ग्राम पंचायत एवं वार्डवार कमेटियां गठित की जाएगी. ताकि संगठन को मजबूत बनाकर आने वाले चुनाव में सत्ताधारी पार्टी से मुकाबला किया जाय. कमेटी गठन की जिम्मेदारी ब्लाक और मण्डलम अध्यक्ष को दी गई है. निष्ठावान एवं पार्टी के प्रति समर्पण रखने वाले कार्यकर्ताओ को पहली प्राथमिकता दी जाएगी. खास बात यह है कि कमेटियों में हर जाति वर्ग एवं महिलाओं की भागीदारी होगी. बूथ स्तर पर कांग्रेस का संगठन नही है संगठनात्मक ढ़ांचा बहुत ही कमजोर है और उसी कमजोरी को दूर करने के लिये अब पार्टी पंचायत एवं वार्ड स्तर पर कमेटियां बना रही है ताकि बूथ स्तर पर संगठन की पकड़ हो
