
सिंगरौली। चितरंगी ब्लॉक के सिलफोरी-सिधार क्षेत्र स्थित गुरहर पहाड़ में प्रस्तावित सोने की खदान परियोजना को लेकर स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों के बीच असहमति के स्वर सामने आ रहे हैं। हाल ही में आयोजित लोक जनसुनवाई में कई ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए क्षेत्र में खनन गतिविधि शुरू किए जाने पर चिंता व्यक्त की। जनसुनवाई के बाद इस विषय पर इलाके में चर्चा बढ़ गई है।
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने भूमि, जंगल और जलस्रोतों पर संभावित प्रभाव को लेकर अपने विचार रखे। उनका कहना रहा कि प्रस्तावित खनन से पहाड़ की भौगोलिक संरचना तथा आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों पर असर पड़ सकता है, जिससे पेयजल उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही कुछ लोगों ने रोजगार के अवसरों और स्थानीय युवाओं की भागीदारी को लेकर भी अपने अनुभव साझा किए।
बैठक में विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठे। ग्रामीणों ने मुआवजा, आवास, रोजगार तथा बुनियादी सुविधाओं के संबंध में स्पष्ट जानकारी और विस्तृत योजना सार्वजनिक किए जाने की मांग रखी। जनप्रतिनिधियों ने भी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और ग्रामीणों की आपत्तियों पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता बताई।
पर्यावरण को लेकर जताई गई चिंताएं
स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े कुछ जानकारों ने कहा कि यदि खनन कार्य शुरू होता है तो वायु, जल और भूमि की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। उनका मत है कि किसी भी परियोजना से पहले पर्यावरणीय पहलुओं का विस्तृत आकलन और दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन आवश्यक है।
विकास और आजीविका के बीच संतुलन पर जोर
ग्रामीणों ने विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय आजीविका, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सामाजिक ढांचे के संरक्षण पर संतुलित निर्णय लेने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों की जीवनशैली, जलस्रोतों और कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया तय की जानी चाहिए।
