जबलपुर:समर्थन मूल्य पर चल रही ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी में समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। हाल ही में पांच दिनों तक बंद रहे पोर्टल को 1 दिन के लिए खोला गया था, जहां 5 दिन तक तो किसान परेशान थे, वही एक दिन के लिए खुले पोर्टल में जिले के लगभग 3000 किसानों ने स्लॉट बुक किए हैं। परंतु इन 3000 किसानों की फसल पूरी तरह बिक जाएगी, इस पर भी अभी संकट गहरा रहा है।
जानकारी के अनुसार केंद्रीय एजेंसी अपना लक्ष्य पूरा कर चुकी है, अब उसके ऊपर जो भी खरीद होगी, वह प्रदेश सरकार की उपार्जन एजेंसी विपणन संघ याने की मार्कफेड के द्वारा की जाएगी। लेकिन मार्कफेड कहीं न कहीं वित्तीय संकट से जूझ रही है और प्रदेश सरकार से प्रतिपूर्ति का इंतजार कर रही है। यदि प्रदेश सरकार फंड की व्यवस्था करती है तो फिर जो एक बहुत बड़ी मात्रा किसानों के पास उड़द मूंग की है, उसे खरीदा जा सकेगा नहीं तो एक दिन की स्लॉट बुकिंग करने के बाद कोई बहुत ज्यादा राहत किसानों को नहीं मिलेगी।
मात्र 3.51 लाख टन की मंजूरी
मध्य प्रदेश में मूंग उड़द उपार्जन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसी एनसीसीएफ को उपार्जन का काम दिया गया है। जिसके लिए केंद्र ने 3.51 टन का लक्ष्य रखा हुआ था, जबकि मध्य प्रदेश में 11 से 12 लाख टन उड़द मूंग का उत्पादन होता है, जिसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने 8.45 लाख टन उपार्जन के लिए केंद्र प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन वहां से मात्र 3.51 लाख टन की मंजूरी प्राप्त हो सकी। जैसे ही यह लक्ष्य पूरा हुआ तो सेंटर से खरीदी बंद करने के कारण स्टॉल बुकिंग सिस्टम बंद हो गया।
8.45 लाख टन खरीदी का प्रस्ताव भेजा
वर्तमान में प्रदेश में लगभग 6.5 लाख टन उड़द मूंग की खरीदी हो चुकी है और एक बहुत बड़ी मात्रा है जो कि अभी खरीदना बाकी है । जिसको लेकर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर से केंद्र के पास 8.45 लाख टन खरीदी का प्रस्ताव भेजा हुआ है। अब देखना होगा कि यह प्रस्ताव पास होता है तो स्लॉट बुक किए हुए किसानों की फसल की खरीदी 8 अगस्त तक हो पाती है या नहीं।
