
ग्वालियर। आज के दौर में प्रबंधन केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण एवं नैतिक मूल्यों का समावेश आवश्यक हो गया है। सतत व्यावसायिक प्रथाएं ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन सकती हैं। यह बात इग्नू के पूर्व कुलगुरु प्रो.नागेश्वर राव ने शनिवार को जीवाजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ स्टडीज इन मैनेजमेंट द्वारा “समकालीन प्रबंधन के लिए सतत व्यावसायिक प्रथाएं: नवाचारी समाधानों की खोज” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि कही।प्रो.योगेश उपाध्याय, डॉ. राजकुमार आचार्य, प्रो.राजेंद्र खटीक, डॉ.राजीव मिश्रा, डॉ.स्वर्णा परमार मंचाशीन रहे। यह संगोष्ठी पीएम-उषा के अंतर्गत आयोजित की जा रही है जिसका उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में प्रबंधन शिक्षा को अधिक व्यवहारिक, नवाचारी एवं सतत बनाना है। अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात कार्यक्रम संयोजक डॉ.स्वर्णा परमार ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित आईटीएम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. योगेश उपाध्याय ने कहा कि समकालीन प्रबंधन में तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रबंधन शिक्षा को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर अपडेट करना होगा। सतत विकास के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नवाचारी व्यावसायिक मॉडल तैयार करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह आत्मविवेचन का समय है।जिसके पास ज्यादा विकल्प है वह अमीर है जिसके पास कम विकल्प है वह गरीब है सब विकल्पों का खेल है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ.राजकुमार आचार्य ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है। उन्होंने कहा कि पीएम-उषा जैसी योजनाएं उच्च शिक्षा को गुणवत्ता, शोध और नवाचार से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। इस प्रकार की संगोष्ठियां शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नई सोच और दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। कार्यक्रम के दौरान स्मारिका का विमोचन किया गया। तत्पश्चात सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। संचालन डॉ.प्रियदर्शिनी नागौरी,खुशी कुशवाह, यश टिलवानी ने किया वहीं आभार प्रो.राजेंद्र खटीक ने व्यक्त किया।
*शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रबंधन विशेषज्ञों ने पढ़े 20 से अधिक शोधपत्र*
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिसमें देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रबंधन विशेषज्ञों द्वारा 20 से अधिक शोध पत्रों का वाचन किया गया।जिनमें सतत विकास, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, हरित प्रबंधन, सामाजिक उद्यमिता एवं नवाचार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर प्रो.आईके पात्रो, प्रो.एके सिंह, डॉ.सुशील मंडेलिया, डॉ.सतेंद्र सिकरवार, प्रो. विवेक बापट, प्रो.जेएन गौतम, प्रो. एसएन महापात्रा, प्रो. एसके सिंह, प्रो. शांतिदेव सिसौदिया, प्रो. महेंद्र गुप्ता, डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. समीर भाग्यवंत, प्रो. डीसी गुप्ता, डॉ. नवनीत गरूड़, डॉ.पीके जैन सहित शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
