
इंदौर. शुक्रवार सुबह केंद्रीय जेल का माहौल आम दिनों से बिल्कुल अलग नजर आया. मुख्य द्वार से ही ढोल-नगाड़ों की आवाज और जयकारों के बीच राष्ट्रीय संत गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का आगमन हुआ. उनके स्वागत में आदिवासी बंदियों का भगोरिया नृत्य दल आगे-आगे चल रहा था, जबकि महिला बंदियों ने सिर पर कलश रखकर जुलूस निकाला. पूरा परिसर कुछ देर के लिए किसी धार्मिक आयोजन स्थल जैसा दिखाई देने लगा.
संतश्री के साथ पहुंचे जेल महानिदेशक वरुण कपूर सपत्नीक कार्यक्रम में शामिल हुए. प्रवेश के बाद स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने जेल में बने उत्पादों की प्रदर्शनी देखी और बाल राधा-कृष्ण बने बच्चों से आत्मीयता से मुलाकात कर उन्हें उपहार दिए. मुख्य मंच पर श्रीकृष्ण के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई. बंदी और बंदिनियों के समूह ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शक दीर्घा में बैठे बंदी तालियों के साथ झूमते नजर आए. मंत्रोच्चार के बीच संतश्री का चरण प्रक्षालन हुआ. महानिदेशक वरुण कपूर ने उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट किया.
कर्म, संयम और आत्मशुद्धि का दिया संदेश
अपने संबोधन में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने गीता के श्लोकों के माध्यम से कर्म, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मनुष्य अपने कर्म से जीवन की दिशा बदल सकता है. प्रवचन के दौरान कई बंदी भावुक होते भी दिखाई दिए. करीब एक हजार बंदियों की मौजूदगी में पूरा परिसर अनुशासन और श्रद्धा से भरा रहा. कार्यक्रम के अंत में वरुण कपूर ने संतश्री का आभार जताया.
