रात में अमरकंटक में दिखा बाघ, राहगीर ने बनाया, वन विभाग को मिले पगमार्क 

अमरकंटक। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की विश्व प्रसिद्ध मां नर्मदा की उद्गम नगरी अमरकंटक के जलेश्वर क्षेत्र में गुरुवार-शुक्रवार की शहडोल-अमरकंटक मुख्य मार्ग पर बाघ के टहलने का वीडियो वहां से गुजर रहे कार सवार शिक्षक दंपति ने अपने मोबाइल में कैद किया हैं। ज्ञात हो कि अमरकंटक जलेश्वर क्षेत्र और आसपास के जंगलों में बीते तीन दिनों से बाघिन की मूवमेंट देखे जाने की चर्चा है।

जानकारी के अनुसार, पार्षद देवानंद खत्री के रिश्तेदार पेंड्रा (छग) निवासी शिक्षक दंपति ने जलेश्वर से घाट उतरते समय मार्ग पर सड़क पार करता बाघ को सड़क पर चलते और फेंसिंग पार करने की कोशिश करते देखा और कार से ही वीडियो बनाया जिसमें एक सियार भी आसपास घूमते और आवाज करते दिखाई दे रहा है। बाघिन जंगल की ओर जाना चाह रही थी, लेकिन सड़क किनारे वन विभाग द्वारा लगाए गए कांटेदार तार के कारण वह कुछ देर तक इधर-उधर घूमती रही, इसके बाद उसने छलांग लगाकर तार पार किया और जंगल की ओर चली गई। करीब दो मिनट के इस वीडियो में बाघिन की चहलकदमी साफ देखी जा सकती है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम रात में ही मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बाघ जंगल में जा चुका था। शुक्रवार सुबह की जांच में वन विभाग को मौके पर बाघ के पैरों के निशान (पगमार्क) मिले हैं।

वन परिक्षेत्र अधिकारी वीरेंद्र श्रीवास्तव ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह बाघ संभवतः छत्तीसगढ़ के अचानकमर टाइगर रिजर्व से भटककर अमरकंटक पहुंचा होगा। वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए मुनादी कराई जा रही है।

गत वर्ष आई थी मादा बाघिन

अमरकंटक में बाघ की आहट ने पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। पिछले साल जनवरी में भी एक मादा बाघिन इस इलाके में आई थी, जिसने भेजरी और जलेश्वर में गायों का शिकार किया था। उस समय नर्मदा जन्मोत्सव के दौरान भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने उस बाघिन को रेस्क्यू कर सीधी भेजा था। अब एक बार फिर बाघ की सक्रियता ने स्थानीय लोगों और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले या पैदल बाहर न निकलें।

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