
सौंसर।सौसर विकास खंड की बहुचर्चित पंचायत रामाकोना में लाखों रुपये की आर्थिक अनियमितता के मामले में आरोपी सरपंच श्वेता गगन गोहेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कमिश्नर न्यायालय ने सरपंच को गिरफ्तारी से बचाने के लिए दिए गए स्टे आदेश को आखिरकार निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद अब प्रशासन कभी भी सरपंच की गिरफ्तारी की कार्रवाई कर सकता है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, रामाकोना सरपंच पर 3 लाख 67 हजार 55 रुपये की राशि जनपद पंचायत में जमा करने का आदेश पारित किया गया था। निर्धारित समय सीमा के भीतर यह राशि जमा नहीं करने पर जिला पंचायत न्यायालय ने 27 नवंबर 2025 को सरपंच के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। हालांकि, सरपंच ने न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगवा ली थी।
कमिश्नर कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर न्यायालय ने संपूर्ण प्रकरण की विस्तृत सुनवाई की और पाया कि भ्रष्टाचार के मामले में राहत देना उचित नहीं है। न्यायालय ने पुराने स्थगन आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इससे साफ है कि अब सरपंच को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना ही होगा।
विकास कार्य ठप, ग्रामीणों में आक्रोश
पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार और कानूनी उलझनों के कारण गांव का विकास पूरी तरह ठप्प हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच की कार्यप्रणाली से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
शिकायत और जांच के आंकड़े:
पूर्व उपसरपंच मुन्नाभाई अब्दुल कलाम ने बताया कि पंचायत में 20 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत दर्ज की गई थी। जांच में 7 लाख 34 हजार 111 रुपये की अनियमितता प्रमाणित हुई है। मुन्ना भाई ने स्टे हटने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई में तेजी आने की पूरी उम्मीद जताई है। इधर मामले को लेकर जब सरपंच श्वेता गोहेल से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नही हो पाई। बहरहाल सरपंच की गिरफ्तारी पर स्टे आदेश निरस्त होने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्ख़ियों में है।
