उद्योग जगत ने आरबीआई के बयान में एमएसएमई, रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रोत्साहन की तारीफ की

नयी दिल्ली, 06 फरवरी (वार्ता) उद्योग जगत ने रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयानों में रेपो दर को स्थिर रखने को समयानुकूल बताया और एमएसएमई तथा रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रोत्साहन के लिए किये गये उपायों की तारीफ की।

बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल ने कहा कि आरबीआई का यह कदम उसकी अपेक्षा के अनुरूप था और अगली द्विमासिक बैठक में भी रेपो दर के यथावत रहने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि इसी महीने नयी सीरीज के आधार पर जारी होने वाले खुदरा महंगाई और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े कैसे रहते हैं। उसने अगले वित्त वर्ष में जीडीपी में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया है और कहा है कि खुदरा महंगाई पांच प्रतिशत पर रहेगी।

बॉन्ड बाजार के लिए रिजर्व बैंक का समर्थन महत्वपूर्ण होगा। केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए उधारी का लक्ष्य बढ़ाकर 17.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। पिछले वित्त वर्ष में यह लक्ष्य 14.6 लाख करोड़ रुपये था।

ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि आरबीआई के फैसले ने वर्तमान भू-राजनैतिक घटनाक्रम, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय कॅमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव से उत्पन्न संभावित विकास जोखिमों का उल्लेख किया है। यदि विकास पर इन कारकों का प्रभाव पड़ता है तो भविष्य रेपो दर में बदलाव संभव है।

भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर संघों के परिसंघ (क्रेडाई) के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि रेपो दर को स्थिर रखने का फैसला वैश्विक स्तर पर मुद्राओं की अस्थिरता और बॉन्ड रिटर्न के दबाव के बीच नीतिगत स्थिरता प्रदान करता है। यह रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक है। जैसे-जैसे नकदी की स्थिति सामान्य हो रही है, स्थिर ब्याज दर व्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित वृद्धि को समर्थन देती है। व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय के साथ रेपो दरों में संतुलित कटौती से आवास खरीदने की मांग में और सुधार हो सकता है।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के भारत एवं दक्षिण एशिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पी.डी. सिंह ने कहा कि एमएसएमई के लिए रेहन-मुक्त ऋण सीमा बढ़ाकर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने पर जोर, एनबीएफसी, रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (रिट्स) और शहरी सहकारी बैंकों का समर्थन, कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का आगे विकास और विदेशी प्रवाह को प्रोत्साहन से बाजार में और अधिक गहराई आयेगी।

भारतीय रिट्स संघ (आईआरए) ने बैंकों को रिट्स को सीधे ऋण देने की अनुमति को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि बैंक ऋण तक प्रत्यक्ष पहुंच रिट्स को स्थिर, दीर्घकालिक वित्त का स्रोत प्रदान करती है। यह विशेष रूप से उस परिसंपत्ति वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है जो दीर्घ-अवधि, आय-उत्पादक रियल एस्टेट पर आधारित है। वर्तमान में रिट्स डेट सिक्योरिटीज के माध्यम से धन जुटाते हैं, जिन्हें म्युचुअल फंड, एनबीएफसी आदि सब्सक्राइब करते हैं। चूंकि ये निवेशक तीन से पांच साल वाले साधनों को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए दीर्घकालिक फंडिंग एक चुनौती बनी रहती है।

एलएंडटी फाइनेंस के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ सुदीप्ता रॉय ने मौद्रिक नीति घोषणाओं को अपेक्षा के अनुरूप बताते हुए कहा कि यह घरेलू आर्थिक लचीलेपन तथा निरंतर नीतिगत समर्थन का भरोसा देती हैं। तंत्र में नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बयान से वित्त जुटाने की लागत पर दबाव होगा। एमएसएमई के लिए बिना रेहन ऋण सीमा को दोगुना करने और रिट्स के माध्यम से रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक फंडिंग को बढ़ावा देने जैसे उपाय ऋण परिदृश्य के लिए बेहद सकारात्मक हैं।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर (अनुसंधान) विक्रांत चतुर्वेदी कहा कि आरबीआई के निर्णय देश की वृहत अर्थव्यवस्था की मजबूती में विश्वास को दर्शाता है, जहां मुद्रास्फीति नियंत्रित रहने के साथ विकास स्थिर बना हुआ है। नीतिगत दरों को यथावत रखना संकेत देता है कि वर्तमान दर स्तर मांग को समर्थन देने और मूल्य स्थिरता बनाये रखने के बीच संतुलित है। क्रेडिट रेटिंग्स के दृष्टिकोण से स्थिर नीतिगत दरें और मजबूत विकास ऋण-सेवा क्षमता और रेटिंग स्थिरता के लिए सहायक हैं।

क्रेडाई-एमसीएचआई के अध्यक्ष सुखराज नाहर ने केंद्रीय बैंक के फैसलों को विवेकपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण वाला बताया। उन्होंने कहा कि आरबीआई के बयान रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए नीतिगत निरंतरता प्रदान करते हैं और पहले की दर कटौतियों के लाभों को बनाये रखते हुए ऋण प्रवाह और खरीदारों के भरोसे को समर्थन देते हैं।

ओम्नीसाइंस कैपिटल की अध्यक्ष एवं मुख्य पोर्टफोलियो प्रबंधक अश्विनी शामी कहा कि रेपो दरों को स्थिर रखना अपेक्षित था। मजबूत घरेलू उपभोग और संभावित व्यापार समझौतों के समर्थन से बाह्य क्षेत्र में स्थिरता के साथ विकास परिदृश्य सशक्त बना हुआ है। पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर से विकास की गति बने रहने की उम्मीद है, जिसे कम मुद्रास्फीति वाला वातावरण और समर्थन देगा।

 

 

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