
जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने एक याचिका का इस निर्देश के साथ निराकरण कर दिया कि यदि याचिकाकर्ता पात्र पाया जाए तो उसे 60 दिन के भीतर नियमितिकरण का लाभ प्रदान किया जाए।
याचिकाकर्ता सांची यूनिवर्सिटी आफ बुद्धिस्ट-इंडिक स्टडीज रायसेन में 2014 से दैनिक वेतनभोगी बतौर कार्यरत नीलेश द्विवेदी की ओर से दलील दी गई कि यूनिवर्सिटी के कुलगुरु को निर्देश दिया जाए कि सुप्रीम कोर्ट के कर्नाटक राज्य बनाम उमा देवी के न्यायदृष्टांत की रोशनी में याचिकाकर्ता को नियमितिकरण का लाभ दें। याचिकाकर्ता ने तीन दिसंबर 2024 और सात जनवरी 2026 को अभ्यावेदन दिए थे, जो लंबित हैं। जिसका निराकरण किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि दैवेभो को सेवा अवधि की गणना के आधार पर नियमितिकरण का लाभ दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। जिसका परिपालन सुनिश्चित होना चाहिए।
