
इंदौर. शहर में आवारा श्वानों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम द्वारा अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं.
उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भी ज़मीनी स्तर पर हालात में खास बदलाव नहीं देखा गया है करीब दो माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगरीय निकायों को सार्वजनिक स्थानों से आवारा श्वानों को हटाकर उन्हें डॉग शेल्टर होम में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे लेकिन इंदौर में इन निर्देशों पर अमल होता नहीं दिख रहा है. नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में दो लाख से अधिक आवारा श्वान हैं और प्रतिदिन औसतन 200 लोग श्वान काटने का शिकार हो रहे हैं. फिलहाल देवगुराडिया ट्रेंचिंग ग्राउंड पर स्थित एकमात्र डॉग शेल्टर होम की क्षमता केवल 200 श्वानों की है. निगम प्रशासन का कहना है कि नए डॉग शेल्टर होम के लिए तीन-चार स्थान देखे जा चुके हैं लेकिन अब तक किसी स्थान को अंतिम रूप नहीं दिया गया है. ऐसे में आवारा श्वानों की बढ़ती समस्या को लेकर नागरिकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
इनका कहना है…
सार्वजनिक स्थान पर आवारा श्वान कहां से पहुंचते हैं यह बिंदु पर गौर करने वाली बात है. कच्ची बस्ती और मोहल्ला को टारगेट करना चाहिए. इनकी तादाद अधिक वहीं होती है.
– याकूब अली
शहर का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं बचा जहां आज भी आवारा श्वानों की टोली दिखाई नहीं देती हो जिससे साफ जाहिर होता है की कार्रवाई की पहल अब तक नहीं हुई.
– मुन्नालाल आर्य
डॉग बाइट के शिकार अधिकतर बच्चे महिलाएं एवं बुजुर्ग होते हैं. आवारा श्वानों की समस्या शहर में बढ़ती जा रही है. हालात को देखते लापरवाही हुई तो इससे निपटना आसान नहीं होगा.
– राहुल सालवी
