
सतना . संतान प्राप्ति पर उत्सव मनाना लाजिमी है, लेकिन हास्पिटल रोड जैसे व्यस्ततम मार्ग पर यही उत्सव दूसरों की परेशानी का कारण बनता नजर आने लगा है. दरअसल पिछले कुछ दिनों से शहर में नया चलन यह शुरु हुआ है. चिकित्सालय में जन्म लेने के बाद नवजात को वापस घर ले जाने के दौरान डीजे वाहन को भी साथ ले जाया जाता है. जिसके चलते एक ओर जहां जिला चिकित्सालय जैसे शांत क्षेत्र में डीजे की कान-फोड़ू आवाज मरीजों को विचलित करती है. वहीं दूसरी ओर मार्ग पर जाम लगने के कारण आपात स्थिति में आ-जा रही एंबुलेंस का रास्ता भी रुक जाता है.
संतान के जन्म लेने के बाद उसे वापस घर ले जाने के दौरान सजे हुए वाहन के साथ गाजा-बाजा और डीजे के उपयोग का नया चलन शहर में अब तक कुछ निजी अस्पतालों के बाहर ही देखने को मिलता था. लेकिन पिछले 6 महीने से यह चलन जिला चिकित्सालय में भी शुरु हो गया है. चिकित्सालय में जन्म लेने के नवजात को फूल या गुब्बारों से सजे हुए वाहन और डीजे वाहन के साथ वापस घर की ओर ले जाया जाता है. हलांकि इस तरह फूल-गुब्बारों से सजे वाहन और डीजे वाहन अस्पताल परिसर के अंदर प्रवेश नहीं करते. लेकिन मुख्य गेट के सामने सडक़ किनारे घंटों खड़े रहने के कारण वहां की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती नजर आती है. जिसका नतीजा यह होता है कि गंभीर मरीजों को अस्पताल के अंदर ला रही एंबुलेंस अथवा रेफर गंभीर मरीज को बाहर ले जा रही एंबुलेंस वहां पर लगे जाम में बुरी तरह से फंस कर रह जाती हैं.इतना ही नहीं बल्कि अस्पताल की ओर जाने वाले मरीज-परिजन, आटो, दोपहिया वाहन सहित अस्पताल का स्टॉफ सभी के लिए समस्या खड़ी हो जाती है. इसके अलावा अस्पताल के बाहर जोर-जोर से डीजे बजने के कारण वहां पर मौजूद मरीजों की परेशानी कई गुना अधिक बढ़ जाती है. समस्या परिसर से बाहर की होने के कारण अस्पताल प्रशासन को इससे पल्ला झाडऩे में जरा सी भी देर नहीं लगती. वहीं नगर निगम काअतिक्रमण दस्ता और यातायात अमले को कभी भी इस ओर झांकने की सुध ही नहीं रहती.
आधी सडक़ पर अतिक्रमण
जिला चिकित्सालय के दोनों मुख्य गेट के बीच सडक़ किनारे अघोषित पार्किंग बन चुकी है. जहां पर दो-चार पहिया वाहन एक लाइन में खड़े रहते हैं. वहीं सडक़ के दूसरी ओर लगने वाले ठेले भी धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए मार्ग का आधा स्थान घेर चुके हैं. रही सही कसर ई रिक्शा, आटो और कुछ निजी वाहनों ने पूरी कर दी है. आलम यह है कि हास्पिटल रोड पर लगभग 60 फीसदी से अधिक हिस्से पर अतिक्रमण पसरा हुआ है. लिहाजा उक्त मार्ग पर आमजन, एंबुलेंस अथवा अन्य वाहनों के निकलने के लिए महज एक संकरी गलीनुमा रास्ता ही बचा रहता है. नतीजतन अतिक्रमण और अव्यवस्था के मिले-जुले गठजोड़ ने उक्त मार्ग दुर्गति करने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी है.
