
जबलपुर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए देश का आम बजट पेश किया जिसको लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भाजपाईयों ने खुलकर सराहना की तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने बजट की आलोचना की है। विपक्षी नेताओं और कुछ किसान संगठनों ने बजट को निराशाजनक बताया है। कांग्रेसियों का कहना है कि बजट में गरीब तबके के लिए कुछ नहीं है। महंगाई, बेरोजगारी दूर करने कोई कदम नहीं उठाए गए । भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल संकट ठहरा हुआ वेतन, कमजोर उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में सुस्ती है, लेकिन बजट में उपभोक्ता मांग को गति देने का कोई विचार नहीं दिखता है। इस बजट में शिक्षित युवाओं में फैले व्यापक बेरोजगारी संकट के समाधान से जुड़ी कोई बात नहीं है। आम नागरिकों को लूटने वाला बजट है। उधर भाजपा ने आशा से भरा और देश की सशक्त वित्तीय समृद्धि की आधारशिला रखने वाला बजट बताया है। भाजपाईयों का कहना है कि किसानों के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं, वृद्ध जनों के लिए भी बजट में बेहतर प्रावधान किए गए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान बजट में किए हैं। देश का बजट विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने वाला एतेहासिक रोडमैप है। यह बजट रोजगार सृजन और देश को सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बजट में आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और विकास के रास्ते पर चलने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई है जो पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत बनाने में सरकार की इच्छा शक्ति को दर्शाती हैं। बजट में विकसित भारत और भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोकर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते हुए काम करने की संकल्पना स्पष्ट रूप से नजर आती है। बजट में आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई है। वहीं आम नागरिकों ने बजट को महंगे-सस्ते के चश्मे से देखा।
