नयी दिल्ली, 01 फरवरी (वार्ता) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को बजट पेश होने के बाद रेल भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि भारत कृत्रिम बौद्धिकता (एआई) के क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े हब के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने डिजिटल और तकनीकी विकास को बजट की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल बताया और कहा कि भारत का एआई-पारिस्थितिकी तंत्र आज पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित, निवेश-अनुकूल बन चुका है।
श्री वैष्णव ने बताया कि इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सेमीकॉन 2.0 और सेमीकॉन 1.0 की सफलता के आधार पर आगे बढ़ रहा है, जो सेमीकंडक्टर के उपकरणों, सामग्री का घेरलू विनिर्माण और डिज़ाइन और प्रतिभा पारिस्थितकी तंत्र को मज़बूत करने पर फोकस करता है। उन्होंने मंत्रालय के तहत आईटी सेवाओं में बड़े सुधारों की भी घोषणा की। जिसमें टैक्स और लागू करने को आसान बनाना, और एआई डेटा सेंटर्स के लिए मज़बूत समर्थन शामिल है—जिसे 8.25 लाख करोड़ रुपये (90 बिलियन डॉलर) तक के निवेश और 2047 तक टैक्स हॉलिडे का सपोर्ट मिला है—जो भारत को वैश्विक एआई हब के तौर पर स्थापित करेगा।
श्री वैष्णव ने बताया कि एआई और तकनीक को लेकर बजट में मिले प्रोत्साहन से देश में एआई -संबंधित बुनियादी ढांचे, डेटा-सेंटर, जीपीयू (ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट) क्षमता और शोध को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत किसी अन्य देश की नकल नहीं कर रहा, बल्कि अपनी रणनीति के साथ एक वास्तविक और व्यावहारिक एआई विकास मॉडल तैयार कर रहा है।
श्री वैष्णव ने कहा कि एआई सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था का अगला बड़ा इंजन है, और भारत की रणनीति इसे विश्व स्तर पर एक प्रमुख एआई हब के रूप में स्थापित करने की है। उन्होंने कहा कि सरकार एआई का उपयोग, स्किलिंग, रिसर्च और निवेश को समान रूप से बढ़ावा दे रही है ताकि देश के युवा, स्टार्टअप्स तथा उद्योग सभी इस तकनीक का लाभ उठा सकें।
