बजट 2026: 165 साल की परंपरा के साथ विकसित भारत का नया रोडमैप; स्वास्थ्य, शिक्षा और रक्षा पर बड़ा दांव

​नई दिल्ली: भारत के 165 साल के बजटीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए सरकार ने इस वर्ष 53.5 लाख करोड़ रुपये का विशाल बजट पेश किया है। 1860 में चमड़े के झोले से शुरू हुआ यह सफर आज देश की आर्थिक धुरी बन चुका है, जिसमें समय और तकनीक के साथ परंपराएं भी बदली हैं। इस बार के बजट में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (Capex) और 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। जहाँ एक ओर टियर-2 और टियर-3 शहरों के कायाकल्प और रक्षा आधुनिकीकरण पर जोर है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में आम आदमी को बड़ी राहत देने की कोशिश की गई है।

 

आम आदमी और करदाताओं को राहत

​सरकार ने विदेश पैसे भेजने और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को सस्ता करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब ओवरसीज टूर प्रोग्राम और विदेश रुपये भेजने पर लगने वाला टैक्स 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इसके अलावा, कस्टम ड्यूटी में छूट मिलने से कई आयातित वस्तुएं सस्ती होंगी। मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ा बदलाव नया इनकम टैक्स एक्ट है, जो अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत से प्रभावी होगा।

​शहरी विकास और बुनियादी ढांचा

​देश के छोटे शहरों को महानगरों की तर्ज पर विकसित करने के लिए 5 लाख से अधिक आबादी वाले टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया गया है। यह निवेश न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेगा बल्कि शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करेगा।

बजट की मुख्य विशेषताएं: एक नजर में

क्षेत्र प्रमुख घोषणाएं

स्वास्थ्य (Health) कैंसर की 17 दवाएं और 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाइयां ड्यूटी फ्री; 5 नए मेडिकल हब बनेंगे।

शिक्षा (Education) 800 जिलों में लड़कियों के लिए हॉस्टल; 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब्स’।

रक्षा (Defense) ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आधुनिकीकरण के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च।

उद्योग (Industry) MSME के लिए 10,000 करोड़ का फंड; इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट के लिए 40,000 करोड़ का प्रावधान।

पर्यावरण (Green Energy) कार्बन कैप्चर (स्टील/सीमेंट) और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 20,000 करोड़ रुपये।

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