
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बजट का मुख्य लक्ष्य विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को गति देते हुए आर्थिक मजबूती, निवेश विस्तार और आमजन की आकांक्षाओं को पूरा करना है। बजट में विकास को बढ़ाने, संसाधनों तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने और हर वर्ग को अवसर देने के तीन प्रमुख स्तंभों पर फोकस किया गया है, वहीं तकनीक, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समान रूप से सशक्त करने की दिशा में कई अहम घोषणाएं की गई हैं।
प्रस्तुत बजट में सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को सामने रखते हुए विकास दर को गति देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने की व्यापक रूपरेखा पेश की है। बजट के तीन मुख्य स्तंभ—विकास को बढ़ाना, सभी की आकांक्षाओं को पूरा करना और संसाधनों तक सार्वभौमिक पहुंच—को केंद्र में रखकर औद्योगिक निवेश, तकनीकी उन्नयन और सामाजिक ढांचे को सुदृढ़ करने की योजनाएं घोषित की गई हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग क्षेत्र में नई फ्रीट व रेयर अर्थ कॉरिडोर पर काम शुरू करने की घोषणा की गई है, वहीं भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत सेमीकंडक्टर उत्पादन और रिसर्च-डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। बायोफार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े निवेश की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके साथ ही नेशनल फाइबर स्कीम, मेगा टेक्सटाइल पार्क और MSME सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड उद्योग जगत को नई ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रामीण उद्यम, खादी और हैंडलूम उद्योग को भी विशेष समर्थन देने की बात कही गई है।
कर व्यवस्था में सरलता लाने के लिए इनकम टैक्स एक्ट को आसान बनाने की योजना प्रस्तुत की गई है तथा संशोधित रिटर्न की समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। एलआरएस पर टीसीएस दर घटाकर 2 प्रतिशत की गई है, जबकि वित्तीय बाजार में कुछ एसटीटी दरों में संशोधन का प्रावधान रखा गया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में तीन नए आयुर्वेद एम्स, मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा और जिला अस्पतालों की क्षमता वृद्धि की घोषणा की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में नई डिजाइन संस्थाओं की स्थापना, यूनिवर्सिटी टाउनशिप और छात्राओं के लिए गर्ल्स हॉस्टल जैसी योजनाओं के जरिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। कृषि क्षेत्र में भारत-विस्तार जैसे एआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की योजना है, वहीं ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए SHE-Marts योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंकिंग सुधार और कार्बन कैप्चर जैसे वित्तीय एवं पर्यावरणीय सुधारों की दिशा में भी पहल की गई है। सरकार ने अर्थव्यवस्था की विकास दर को लगभग 7.4 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने का लक्ष्य रखा है तथा जीएसटी और कॉर्पोरेट टैक्स से राजस्व वृद्धि की उम्मीद जताई है। समग्र रूप से यह बजट औद्योगिक विस्तार, तकनीकी नवाचार, सामाजिक विकास और वित्तीय संतुलन के बीच तालमेल स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
