छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में बवाल: गलती डॉक्टरों की, गाज हम पर क्यों? नर्सिंग स्टाफ ने खोला मोर्चा

छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल में कुछ दिनों पूर्व डाक्टरों की लापरवाही से दो मरीजों की मौत के मामले में की कार्रवाई को लेकर नर्सिंग स्टाफ ने विरोध दर्ज किया है। उन्होंने कहा हमारे साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया गया है। गलती किसी की ठीकरा किसी पर फोड़ दिया। हम लोगों ने फोन पर डाक्टरों को मरीजों की स्थिति की सूचना दे दी थी। इसके बाद भी वह नहीं आए तो हमारी कोई गलती नहीं। नर्सिंग स्टाफ ने सीएस से मिलकर इस कार्रवाई में राहत देने की बात कही है। उन्होंने बताया कि नर्सिंग स्टाफ वार्ड में ड्यूटी करने के अलावा अन्य कार्यों में भागीदारी निभाता है। सरकार की योजनाओं से लेकर अस्पताल के अन्य कामकाज शामिल है। इस कार्रवाई से ऐसा लगता है कि डाक्टरों को अभयदान दिया गया है, नर्सिंंग स्टाफ को इसका खामियाजा भोगना पड़ा। गौरतलब है कि 11 जनवरी को आईसीयू वार्ड में भर्ती चैतु धुर्वे, इंद्राबाई पति सूरजलाल और गायनिकी वार्ड में भर्ती ललिता पति अनमोल डोंगरे के गर्भ के शिशु की डाक्टरों की लापरवाही से मौत हो गई थी। जिसके बाद इनके परिजनों ने जमकर हंगामा मचाया था। इस हंगामें के बाद कलेक्टर ने कार्रवाई करने के निर्देष दिए थे। इस निर्देष के परिपालन में सीएस सुशील दुबे ने इस मामले की जांच के लिए तीन डाक्टरों की एक कमेटी गठित की गई। जिसमें जांच के बाद पाया कि आईसीयू में दो मरीज के मामले में चार डाक्टरों और गर्भ में शिशु की मौत के ममाले में तीन डाक्टरों पर कार्रवाई की गई। इन डाक्टरों पर महज अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। वही दो नर्सिंग आफीसर की एक-एक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देष दिए है। इस मामले में नर्सिंग स्टाफ ने इस कार्रवाई का विरोध किया है।

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