नयी दिल्ली, 27 दिसंबर (वार्ता) अफ्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष महामहिम महमूद अली यूसुफ ने ‘सोमालीलैंड’ को स्वतंत्र देश के रूप में इजरायल के मान्यता देने पर चिंता जाहिर की और दृढ़ता से कहा कि अफ्रीकी संघ आयोग ऐसी किसी भी पहल या कार्रवाई को अस्वीकार करता है, जो सोमालीलैंड को स्वतंत्र इकाई के रूप में मान्यता देने का प्रयास करती हो। उन्होंने यह याद दिलाया कि सोमालीलैंड अब भी सोमालिया के संघीय गणराज्य का अभिन्न हिस्सा है और सोमालिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने का कोई भी प्रयास अफ्रीकी संघ के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। यह महाद्वीप में शांति और स्थिरता के लिए गंभीर और दूरगामी नतीजों वाला खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि साथ ही सोमाली प्रशासन के शांति कायम करने, राज्य संस्थानों को मजबूत करने और समावेशी शासन को बढ़ावा देने के प्रयासों का वे पूर्ण समर्थन करते हैं। इजरायल ने शुक्रवार को सोमालीलैंड को औपचारिक रूप से मान्यता दी है। इसी के साथ वह दुनिया का पहला देश बन गया है, जो ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ इलाके में इस अलग हुए क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कामयाबी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की कि इजरायल और सोमालीलैंड ने पूरे राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किया है और इसे ‘अब्राहम अकॉर्ड की भावना के अनुरूप’ बताया, जो अमेरिका की ओर से इजरायल और अरब देशों के बीच औपचारिक संबंध स्थापित करने के लिए करवाये गये समझौतों का एक हिस्सा है।
इजरायल की घोषणा के कुछ घंटों बाद सोमालिया सरकार ने बयान जारी कर इस कदम को उसकी संप्रभुता पर ‘हमला’ और ‘गैर-कानूनी कार्रवाई’ बताया और सोमालीलैंड को देश का ‘अविभाज्य’ हिस्सा बताया गया। सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से आजादी की घोषणा की थी। उसे संयुक्त राष्ट्र के किसी भी सदस्य देश से मान्यता नहीं मिली है। यह क्षेत्र उत्तरी सोमालिया में है, जो कभी ‘ब्रिटिश संरक्षित क्षेत्र’ था। यह क्षेत्र सोमालिया से एक भीषण गृहयुद्ध के दौरान अलग हुआ था। यह युद्ध ‘सियाद बर्रे’ की तानाशाही सरकार के उन दशकों के बाद शुरू हुआ था, जिसकी सेना ने उत्तरी क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर दिया था। जहां सोमालिया के बड़े हिस्से अराजकता की आग में झुलस गये, वहीं सोमालीलैंड ने 1990 के दशक के अंत तक खुद को स्थिर कर लिया। सोमालीलैंड ने सोमालिया से अलग राजनीतिक पहचान बनायी है। इसकी अपनी मुद्रा, झंडा और संसद है, लेकिन इसके पूर्वी क्षेत्रों पर उन समुदायों का विवाद बना हुआ है, जो राजधानी हरगेइसा में अलगाववादी कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं। हाल के वर्षों में सोमालीलैंड ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश में अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देश संयुक्त अरब अमीरात और ताइवान के साथ संबंध बनाये हैं।

