डीआरडीए कर्मियों को पेंशन का अधिकार क्यों नहीं

जबलपुर: हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, डीआरडीए कर्मियों को पेंशन का अधिकार न होने के रवैये को चुनौती संबंधी याचिका पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में केंद्र व राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं।याचिकाकर्ता छतरपुर निवासी सेवानिवृत्त कर्मी अशोक कुमार रावत की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, विनीत टेहेनगुनिया, शुभम पाटकर, प्रशांत व पूर्णिमा तिवारी ने पक्ष रखा।

उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता 1981 में केंद्र सरकार के गरीबी उन्मूलन हेतु सृजित एजेंसी जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, डीआरडीए में नियुक्त हुआ था। कालांतर में सरकार ने डीआरडीए कर्मियों को जिला पंचायत में विलय कर दिया, जहां पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है। यह रवैया इसलिए अनुचित है क्योंकि केंद्र शासन की गाइडलाइन के अनुसार डीआरडीए कर्मियों को ग्रामीण विकास विभाग में संविलयन करना था। दरअसल, केंद्र सरकार के कृषि एवं सिंचाई मंत्रालय ने 1975 में काम्पेंडियम आफ इंस्ट्रक्शंस आन प्रोजेक्ट्स जारी किया था, जिसमें डीआरडीए कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा, अवकाश वेतन, पेंशन और भविष्य निधि योगदान जैसे लाभ देने की बात कही गई है। इसमें स्पष्ट है कि राज्य सरकार को इन प्रस्तावों के लिए केंद्र से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

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