दावोस/वाशिंगटन | दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच पर कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी वर्चस्व वाली वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाकर खलबली मचा दी। कार्नी ने कहा कि शक्तिशाली देशों द्वारा आर्थिक एकीकरण को हथियार की तरह इस्तेमाल करने और दबाव वाली नीतियों का दौर अब समाप्त होना चाहिए। उन्होंने छोटे और मध्यम देशों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए चेतावनी दी कि जो देश वैश्विक फैसलों की मेज पर नहीं हैं, वे भविष्य के आर्थिक एजेंडे का शिकार बन जाएंगे। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनके भाषण को स्पष्ट रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना के रूप में देखा गया।
कार्नी के बयानों से भड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले ही दिन कड़ा जवाब देते हुए कनाडा को सुरक्षा के मुद्दे पर घेर लिया। ट्रंप ने कहा कि कनाडा को अमेरिका का शुक्रगुजार होना चाहिए क्योंकि अमेरिकी रक्षा कवच के बिना कनाडा सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने अपने ‘गोल्डन डोम’ एयर डिफेंस सिस्टम का हवाला देते हुए सीधे तौर पर कनाडाई प्रधानमंत्री को चेतावनी दी कि, “अगली बार जब तुम कोई बयान दो, तो यह याद रखना कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही जिंदा है।” ट्रंप के इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसे सहयोगी देशों पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप और मार्क कार्नी के बीच यह जुबानी जंग अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिकी नेतृत्व के प्रति बढ़ते प्रतिरोध को दर्शाती है। जहाँ कार्नी एक ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो नियमों पर आधारित हो और दबाव मुक्त हो, वहीं ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत अपने सहयोगियों से पूर्ण कृतज्ञता और समर्थन की अपेक्षा कर रहे हैं। यह तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अमेरिका और कनाडा के व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जी-7 और अन्य वैश्विक मंचों पर यह तकरार और अधिक उग्र रूप ले सकती है।

