
जबलपुर। भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने डी.एन. जैन महाविद्यालय प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय प्रवचनमाला के अंतिम दिवस कहा कि आज मनुष्य के पास धन-संपत्ति और सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन मन की प्रसन्नता और चेहरे की मुस्कान लुप्त हो गई है। यह थकान काम की नहीं, बल्कि मन के बोझ की है। मुनि श्री ने कहा कि जो व्यक्ति कर्म सिद्धांत में विश्वास रखता है, वह बुराई में भी अच्छाई देख लेता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में सुख-दुःख, लाभ-हानि और मान-अपमान आते रहते हैं, लेकिन अच्छे-बुरे में स्थिरता, सुख-दुःख में समता, लाभ-हानि में संतोष और मान-अपमान में सहजता—यही जीवन के मूल तत्व हैं। इन्हें अपनाने वाला व्यक्ति हर परिस्थिति में मुस्करा सकता है।
उन्होंने कहा कि “जो मुझे मिले वह मेरे मन को भाए—यह मेरे हाथ में नहीं, लेकिन जो मिला है उसे मन से स्वीकार करना मेरे हाथ में है।” धर्म और आध्यात्म विपरीत परिस्थितियों में स्थिरता प्रदान करते हैं। सकारात्मक दृष्टि, आत्मविश्वास और कर्म सिद्धांत में विश्वास से जीवन में भटकाव नहीं आता।
होगा कीर्ति स्तंभ का शिलान्यास
मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं सुबोध कामरेड ने बताया कि 22 जनवरी (गुरुवार) को मुनिसंघ प्रातः 7:15 बजे जिनालय वंदना हेतु डी.एन. जैन महाविद्यालय से प्रस्थान करेगा।
23 जनवरी को आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के संयम कीर्ति स्तंभ का शिलान्यास होगा। 25 जनवरी को प्रातः 7:30 से 9:30 बजे तक भावनायोग कार्यक्रम पं. रविशंकर शुक्ल स्टेडियम, राइट टाउन में आयोजित होगा। किट वितरण का कार्य राष्ट्रीय दिगंबर जैन युवा महासंघ एवं जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) द्वारा किया जा रहा है। 27 जनवरी को आचार्य श्री का द्वितीय समाधि दिवस तथा 30 जनवरी से 6 फरवरी तक संस्कृत में लिपिबद्ध 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन होगा। मुनि श्री ने जबलपुर के समस्त श्रद्धालुओं से इस दुर्लभ आध्यात्मिक आयोजन का लाभ लेने का आह्वान किया।
