
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने एक याचिका का इस निर्देश के साथ निराकरण कर दिया कि अवकाश नकदीकरण का लाभ दो माह भीतर प्रदान किया जाए।
दरअसल याचिकाकर्ता बालाघाट निवासी कलीमुद्दीन कुरैशी की ओर से अधिवक्ता प्रेमेंद्र सेन ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने अवकाश के बदले नकदीकरण के लाभ का प्रावधान है। इसी आधार पर विभाग में अभ्यावेदन दिया गया था। लेकिन उसे दरकिनार कर दिया गया। इसी रवैये के कारण हाईकोर्ट की शरण ली गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि नियत अवधि में शिकायत दूर करके याचिकाकर्ता को निर्णय से अवगत कराया जाए।
