नयी दिल्ली 21 जनवरी (वार्ता) वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने सशस्त्र बलों से अतीत की उपलब्धियों में उलझे रहने के बजाय भविष्य की ओर देखने का आह्वान करते हुए कहा है कि वायु सेना की शक्ति ने युद्धक्षेत्र में बार-बार अपनी उपयोगिता सिद्ध की है और आने वाले वर्षों में यह भारत की सैन्य शक्ति का केंद्रीय आधार बनी रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भारत को प्रभावशाली शक्ति बने रहना है तो भविष्य की चुनौतियों की तैयारी पर अधिक ध्यान देना होगा।
वायुसेना प्रमुख ने बुधवार को यहां ‘सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ द्वारा आयोजित 22वें सुब्रोतो मुखर्जी सेमिनार को संबोधित करते हुए देश के आधुनिक युद्ध, विशेषकर आतंकवाद-रोधी अभियानों में भारतीय वायुसेना की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायु सेना ने पाकिस्तान में काफी अंदर स्थित आतंकवादी ठिकानों और लक्ष्यों को निष्क्रिय करने के लिए अनेक सटीक हमले किये।
उन्होंने कहा, “दुनिया में क्या हो रहा है और भारत में क्या हुआ है, सैन्य शक्ति का कौन सा हिस्सा सबसे अधिक उपयोगी साबित हुआ , जिसने अपेक्षित परिणाम दिए। मुझे लगता है इसका नाम लेने की आवश्यकता नहीं है – वह वायु सेना की शक्ति है। यदि हमें एक प्रभावशाली सैन्य शक्ति बनना है तो इस पहलू पर ध्यान केंद्रित करना बेहद जरूरी है।”
एयर चीफ मार्शल ने कहा, “चाहे वह सूडान जैसे संघर्ष के क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालना हो, या आतंकवादी ढांचे और उनके सरगनाओं पर प्रहार करना हो, या कुछ ही घंटों में पाकिस्तान के कई ठिकानों पर हमला कर यह संदेश देना हो कि अब बहुत हो चुका है और उन्हें घुटनों पर ला देना हो — इन सभी में वायु सेना की शक्ति ने निर्णायक भूमिका निभाई है और इसे याद रखा जाना चाहिए।”
उन्होंने किसी भी प्रकार की आत्मसंतुष्टि के प्रति चेतावनी देते हुए तेजी से बदलते और अनिश्चित वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में उभरती चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर जोर दिया। भविष्य की ओर देखने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “आइए, हम अतीत की उपलब्धियों पर न रुकें। आइए, भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करें।”
राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती प्रकृति पर बात करते हुए वायुसेना प्रमुख ने वेनेजुएला और इराक के उदाहरण दिये और कहा कि केवल आर्थिक शक्ति से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। उन्होंने कहा, “हमें यह समझना होगा कि सैन्य शक्ति ही राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम निर्णायक होती है। कोई भी देश आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है, लेकिन सुरक्षित नहीं।”
उन्होंने कहा, “हमारे अपने देश का उदाहरण भी है। एक समय भारत और चीन मिलकर दुनिया की 60 प्रतिशत जीडीपी को नियंत्रित करते थे, लेकिन इससे हमें कब्जे और उपनिवेश बनने से नहीं रोका जा सका। इन सभी शक्तियों का महत्व है, लेकिन अंततः सबसे जरूरी मजबूत सैन्य शक्ति होती है, क्योंकि इसके बिना कोई भी आपको अधीन कर सकता है। वेनेजुएला और इराक इसके उदाहरण हैं। सैन्य शक्ति महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उस सैन्य शक्ति का उपयोग करने की इच्छाशक्ति।”
पिछले वर्ष अक्टूबर में आयोजित वार्षिक प्रेस वार्ता के दौरान वायुसेना प्रमुख ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किए गए हमलों में पाकिस्तान के कई हवाई अड्डों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया था।
पाकिस्तान को हुए नुकसान का विवरण देते हुए वायुसेना प्रमुख ने बताया था, “जहां तक पाकिस्तान के नुकसान का सवाल है, हमने उनके कई एयरफील्ड और अनेक प्रतिष्ठानों पर हमला किया। इन हमलों के कारण कम से कम चार स्थानों पर रडार, दो स्थानों पर कमांड और कंट्रोल सेंटर, दो स्थानों पर रनवे क्षतिग्रस्त हुए। इसके अलावा तीन अलग-अलग स्टेशनों पर स्थित तीन हैंगरों को नुकसान पहुंचा। हमारे पास एक सी-130 श्रेणी के विमान और कम से कम चार से पांच लड़ाकू विमानों के क्षतिग्रस्त होने के संकेत हैं, जो संभवतः एफ-16 थे, क्योंकि उस स्थान पर उस समय एफ-16 विमानों का रखरखाव चल रहा था।”
उन्होंने कहा, “इसके साथ ही एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को भी नष्ट किया गया। हमारे पास 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर किए गए लंबी दूरी के हमले के स्पष्ट प्रमाण हैं, जो या तो एक एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम या एक विमान पर किया गया था, साथ ही एफ-16 और जेएफ-17 श्रेणी के पांच उच्च तकनीक वाले लड़ाकू विमानों को भी नुकसान पहुंचाया गया। यही जानकारी हमारे सिस्टम से मिली है।”
