जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को निर्देशित किया है कि वर्ष 2005 के बाद नियुक्त सहायक प्राध्यापकों को ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) का लाभ प्रदान करें। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने 90 दिन के भीतर कार्रवाई करने कहा है।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती वर्ष 2003 की थी। नियुक्ति आदेश एक जनवरी 2005 को जारी किया गया होगा, लेकिन याचिकाकर्ता पुरानी पेंशन योजना के हकदार होंगे क्योंकि भर्ती वर्ष 2003 से संबंधित है।
जबलपुर निवासी डॉ.अभय सिंह उइके, डॉ. मोना मरकाम सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता मनोज चंसौरिया ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में मप्र लोक सेवा आयोग ने सहायक प्राध्यापक के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा उत्तीर्ण कर अहर्ता हासिल की, लेकिन उन्हें एक जनवरी 2005 के बाद नियुक्ति आदेश जारी किए गए। आवेदकों की ओर से कहा गया कि चूंकि चयन प्रक्रिया का विज्ञापन 2003 में जारी हुआ है, इसलिए आवेदक का पेंशन प्रकरण उसी वर्ष में प्रचलित नियम के अधीन आता है।
न्यायालय को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के अधीन रखा गया है, जबकि 2005 में नियुक्त कुछ उम्मीदवारों को ओपीएस का लाभ दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इसके लिए विभाग को आवेदन किया था। विभाग ने 10 जून 2022 को याचिकाकर्ताओं के आवेदन अमान्य कर दिया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने विभाग का उक्त आदेश निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को ओपीएस का लाभ प्रदान करने के निर्देश दिये है।
