एसआईटी ने किसान आत्महत्या मामले में उधमसिंह नगर के एसएसपी को किया तलब

देहरादून, (वार्ता) उत्तराखंड सरकार द्वारा किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल ने उधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा को बयान दर्ज करने के लिए समन जारी किया है। नैनीताल के एक होटल में आत्महत्या करने के बाद वायरल हुए वीडियो में मृतक ने मणिकांत मिश्रा का नाम लिया था।

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया कि एसएसपी मिश्रा को अपना बयान दर्ज कराने के लिए एसआईटी के सामने पेश होना होगा।

इसमें कहा गया, “एसआईटी ने एसएसपी उधमसिंह नगर, तीन सब-इंस्पेक्टरों और एक सहायक सब-इंस्पेक्टर को पूछताछ के लिए पेश होने और अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया है। ये नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो एवं दिवंगत किसान सुखवंत सिंह के परिवार के सदस्यों के बयानों के मद्देनजर जारी किए गए हैं।”

राज्य पुलिस मुख्यालय ने बयान में कहा कि मृतक किसान के खिलाफ भूमि धोखाधड़ी के आरोपों से संबंधित प्रासंगिक बैंकिंग लेनदेन रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए रजिस्ट्रार एवं तहसील कार्यालयों तथा विभिन्न बैंकों को भी समन जारी किया गया है। इसमें कहा गया कि इन संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर लेनदेन एवं दस्तावेजों की प्रामाणिकता का सत्यापन किया जाएगा।

किसान की मौत से जुड़े सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड हिरासत में लिए गए हैं और उनकी व्यापक फोरेंसिक जांच की जा रही है।

एसआईटी सदस्य और चंपावत जिले के पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने कहा कि एसआईटी के विशेषज्ञ तकनीकी निगरानी के माध्यम से एकत्रित किए गए कॉल विवरण, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी इनपुट का विश्लेषण कर रहे हैं।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर के पैगा गांव के 40 वर्षीय किसान सुखवंत सिंह ने इसी महीने के दूसरे सप्ताह में जमीन सौदे में कई लोगों द्वारा चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी। सुखवंत के ये आरोप पुलिस द्वारा उनके कपड़ों से बरामद सुसाइड नोट और किसान की मौत के बाद वायरल हुए एक वीडियो में सामने आए हैं।

मृतक ने आरोप लगाया था कि चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ पुलिस में उनकी शिकायतों एवं अनुरोधों को नजरअंदाज किया गया। एसएसपी उधमसिंह नगर, एसओ आईटीआई पुलिस स्टेशन और अन्य कर्मचारियों का नाम लेते हुए सुखवंत ने आरोप लगाया था कि जब वह न्याय की गुहार लगाते हुए शिकायत लेकर गए तो उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया गया।

 

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