नीमच में गिलियन-बैरे सिंड्रोम से हडक़ंप, 2 बच्चों की मौत, संक्रमितों की संख्या पहुंची 17  

नीमच। जिले में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। मनासा कस्बे में हुई दो बच्चों की मौत के बाद अब नीमच शहर में भी इस बीमारी के संदिग्ध मामले सामने आने लगे हैं, जिससे आमजन में चिंता बढ़ गई है। नीमच शहर की चावला कॉलोनी और बगीचा नंबर- 13 क्षेत्र से जीबीएस से मिलते-जुलते लक्षणों वाले मामलों की जानकारी मिली है। अभी जिले में करीब 17 लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। इनमें 16 मनासा व 1 नीमच शहर में संक्रमित शामिल है।

नीमच जिले के मनासा कस्बे में गिलियन- बैरे सिंड्रोम का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक इस बीमारी से दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कुल 17 लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। इनमें से 15 मरीज नाबालिग हैं, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। संक्रमितों में 4 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों की संख्या सबसे अधिक है, जबकि केवल दो वयस्क मरीज ही इस बीमारी की चपेट में आए हैं। बच्चों में तेजी से फैल रहे संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है।

सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल ने बताया कि नीमच के बगीचा नंबर- 13 निवासी 65 वर्षीय गुलाब सिंह जादौन के जीबीएस से पीडि़त होने की पुष्टि ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है। परिजनों के अनुसार गुलाब सिंह जादौन 25 दिसंबर से बीमार चल रहे थे। 31 दिसंबर को उदयपुर में जांच के दौरान जीबीएस की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान उन्हें अब तक आईवीआईजी के 25 इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। वर्तमान में उनका उपचार एक निजी चिकित्सालय में जारी है और वे फिजियोथैरेपी भी ले रहे हैं।

सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल ने बताया कि नीमच सिटी के वार्ड क्रमांक- 1 स्थित चावला कॉलोनी में जीबीएस का एक संदिग्ध मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। कॉलोनी का 19 वर्षीय युवक 29 दिसंबर से उदयपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती है, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। डॉक्टरों ने युवक की स्थिति को जीबीएस का संभावित मामला बताया है।

सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल ने बताया कि मनासा ब्लॉक में सामने आए जीबीएस मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच और उपचार तुरंत शुरू किया गया है। नीमच शहर में भी संभावित मामलों को देखते हुए जिला चिकित्सालय में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से ही कर ली गई हैं। जीबीएस के इलाज में उपयोग होने वाला आईवीआईजी इंजेक्शन जिला अस्पताल में उपलब्ध है। इसके अलावा पर्याप्त वेंटिलेटर, सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन और सभी आवश्यक दवाइयां मौजूद हैं। गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को एंबुलेंस सुविधा के माध्यम से इंदौर के एमवाय मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया जा रहा है।

कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने बताया कि संदिग्धों की सूचना मिलते ही अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर पालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया और जलकल विभाग की टीम शनिवार रात ही चावला कॉलोनी पहुंच गई थी और मरीज के परिवार द्वारा उपयोग किए जा रहे ट्यूबवेल से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। जीबीएस की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है और सभी संभावित कारणों की गहन जांच की जा रही है।

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