इंदौर: शहर की सड़कें इन दिनों ट्रैफिक से ज़्यादा टेस्टर मशीनों की गवाह बन रही हैं. बीते एक साल में यातायात पुलिस ने ऐसे ड्राइवरों पर शिकंजा कसते-कसते आंकड़ा वहाँ पहुँचा दिया है, जहाँ रिपोर्ट पढ़कर समझ आता है कि इंदौर में शराब पिए बगैर कुछ लोग शायद ब्रेक भी नहीं दबाते. जनवरी से नवंबर 2025 के बीच 20 हजार से ज़्यादा ड्रिंक एंड ड्राइव पकड़े गए, और इनसे 20 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना वसूला जा चुका है.
यह संख्या उतनी ही चौंकाने वाली है जितना यह तथ्य कि शहर की सड़कें रात के समय शराबियों के लिए मानो रनिंग ट्रैक बन गई थीं. जब तक ट्रैफिक पुलिस ने बीच में खड़े होकर उन्हें याद नहीं दिलाया कि कानून भी कोई चीज़ है. आंकड़े बताते हैं कि हर महीने औसतन 1800 से ज्यादा लोग नशे की हालत में वाहन चलाते हुए पकड़े गए, यानी रोज़ाना लगभग 60 चालक- मानो सड़कें नहीं, हैप्पी आवर हाईवे हों. जुर्माने की राशि भी किसी छोटी-मोटी फाइल का आंकड़ा नहीं. 20 करोड़ पार कर चुका यह कलेक्शन बताता है कि नियम तोड़े बिना शहर के कुछ लोग शायद त्योहार जैसा एहसास ही नहीं लेते.
जारी रहेगा अभियान
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभियान लगातार जारी रहेगा और ड्रिंक एंड ड्राइव पर जीरो टॉलरेंस बरकरार रहेगा. चेकिंग प्वाइंट्स बढ़ाए गए हैं, अल्कोमीटर की संख्या भी, रात का कोई भी कोना ऐसा नहीं बचा जहाँ पुलिस की नजर न हो. कई ऐसे ड्राइवर भी मिले जो खुद को नॉर्मल बताते हुए हकलाते शब्दों में ये समझाने की कोशिश करते रहे कि सिर बस दो पेग ही तो, लेकिन मशीन उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देती है.
सड़क हादसों में कमी आई
यातायात विभाग का दावा है कि इस कार्रवाई से सड़क हादसों में कमी आई है, पर शहर में एक सवाल लगातार गूंज रहा है, क्या हम सुधरेंगे या जुर्माने की रकम ही नया रिकॉर्ड बनाती रहेगी?
