इंदौर:नगर निगम और यशवंत क्लब संपत्तिकर को लेकर आमने-सामने हो गए हैं. क्लब पर ढोल पिटवाने और मुनादी करने के खिलाफ क्लब ने याचिका दायर की. याचिका की सुनवाई करते हुए निगम आयुक्त और एआरओ को नोटिस जारी किया है.नगर निगम को यशवंत क्लब पर 2.64 करोड़ रुपए संपत्तिकर वसूली को लेकर ढोल पिटवाना महंगा पड़ गया है. क्लब ने प्रतिष्ठा खराब करने और हाई कोर्ट की अवमानना याचिका दायर कर दी है. क्लब द्वारा 1989 /2026 दायर याचिका पर हाईकोर्ट से निगम आयुक्त और एआरओ के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं. दरअसल मामला यूं है कि नगर निगम और यशवंत क्लब में 2020 से संपत्ति कर की राशि को लेकर झगड़ा चल रहा है.
निगम ने क्लब में नए निर्माण को लेकर नक्शा आवेदन स्वीकार नहीं किया और संपत्तिकर जमा करने का नोटिस दिया. निगम नक्शा विभाग का सॉफ्टवेयर संपत्ति कर राशि का नो ड्यूज होने पर ही आवेदन स्वीकार करता है. मामला हाईकोर्ट में गया और हाईकोर्ट ने 30 प्रतिशत राशि जमा करने और नक्शा मंजूर करने के आदेश 2023 में दिए थे. इसके बाद से नगर निगम और यशवंत क्लब के बीच टैक्स वसूली को मामला चल रहा है. नगर निगम द्वारा भी हाईकोर्ट में टैक्स बकाया होने को लेकर रिट याचिका दायर की गई है और उस पर सुनवाई चल रही है. इसी बीच 14 मार्च को बकाया होने पर ढोल पिटवा कर मुनादी की गई और नोटिस चस्पा करने के कार्रवाई कर दी गई.
अवमानना याचिक दायर की
क्लब ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाने का लेकर अवमानना याचिका दायर कर दी. हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और सहायक राजस्व अधिकारी प्रशांत पटेल के खिलाफ नोटिस जारी कर उपस्थित होने के निर्देश दिए है. वहीं नगर निगम ने भी याचिका में 2.64 करोड़ रुपए संपत्ति कर के बकाया होने के दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए मांग की है कि टैक्स बढ़ता जा रहा है.
