अगरतला, 19 जनवरी (वार्ता) केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चिटफंड के माध्यम से त्रिपुरा के लोगों से चार करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में शामिल एक व्यक्ति को रविवार को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले से गिरफ्तार किया।
आरोपी की पहचान तपन प्रमाणिक के रूप में हुई है, जिसने लोगों से निवेश के बहाने चार करोड़ रुपये इकट्ठा किया था और फिर उन पैसों को गबन कर गया था। इस संबंध में 2013 में त्रिपुरा में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। त्रिपुरा की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 16 जनवरी, 2023 को तपन को ‘भगोड़ा अपराधी’ घोषित कर दिया था।
स्थानीय पुलिस के अनुसार, खुफिया जानकारी के बाद सीबीआई ने नदिया में उसका पता लगाकर उसे पकड़ लिया। सोमवार को एक स्थानीय अदालत में उसे पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर त्रिपुरा ले जाने का अनुरोध किया गया।
गौरतलब है कि यह मामला एमपी एग्रो-एनिमल्स प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के माध्यम से की गई एक बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है। यह कंपनी 26 दिसंबर, 2008 को नदिया जिले के शांतिपुर में स्थापित एक गैरसूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी थी। कथित तौर पर कंपनी ने ज्यादा रिटर्न के वादे के साथ निवेशकों से बड़ी मात्रा में धन इकट्ठा किया और उसका दुरुपयोग किया। सीबीआई ने त्रिपुरा और केंद्र सरकार दोनों की सूचनाओं के बाद, आठ अक्टूबर 2013 को कंपनी के तत्कालीन निदेशक तपन प्रमाणिक और अन्य के खिलाफ मामला शुरू किया था।
सीबीआई ने जांच पूरी होने के बाद तपन और अन्य संदिग्धों के खिलाफ 13 अक्टूबर 2015 को अपना प्रारंभिक आरोप पत्र और 31 मई 2019 को एक पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। आरोप पत्र दाखिल होने और मुकदमे के दौरान उसका पता लगाने के निरंतर प्रयासों के बावजूद, तपन हाथ नहीं आया, जिसके कारण अदालत को उसे भगोड़ा अपराधी घोषित करना पड़ा।
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी कड़ी निगरानी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच के बाद हो पायी है। एजेंसी का लक्ष्य मुकदमे की प्रक्रिया में तेजी लाना और लंबे समय से लंबित इस चिटफंड मामले को समाधान तक पहुंचाना है।
