सीधी: शहर की सड़कों पर आवारा गौवंश की मौजूदगी एक प्रमुख शहरी चुनौती के रूप में सामने आ रही है। आए दिन सड़कों पर गौवंश के विचरण और आपसी भिड़ंत के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।शहरी क्षेत्र की अधिकांश सड़कों, विशेषकर बाजार और रिहायशी इलाकों में, आवारा गौवंश को खुलेआम घूमते हुए देखा जा सकता है। ये गौवंश दिनभर कचरों में भोजन तलाशते रहते हैं और देर रात तक सड़कों पर बने रहते हैं। हाल ही में अस्पताल मार्ग पर गौवंशों की भिड़ंत के चलते कुछ समय तक आवागमन बाधित रहने की स्थिति भी बनी।
जानकारी के अनुसार, सीधी जिले में आवारा गौवंशों के संरक्षण के लिए 87 गौशालाओं के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। वर्तमान में 27 गौशालाओं का संचालन हो रहा है, जबकि लगभग डेढ़ दर्जन गौशालाएं बनकर तैयार हैं। शेष गौशालाओं का निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर है। प्रत्येक गौशाला में औसतन करीब 100 गौवंश रखने की क्षमता बताई जाती है। गौशालाओं में गौवंश के भरण-पोषण के लिए शासन की ओर से प्रति गौवंश 40 रुपये प्रतिदिन की दर निर्धारित है।सीधी शहर के आसपास नौढिया, डेम्हा, भेलकी, पिपरोहर और नेबूहा में कुल पांच गौशालाएं स्थित हैं। स्थानीय स्तर पर यह सुझाव सामने आया है कि यदि शहरी क्षेत्र के आवारा गौवंशों को इन समीपवर्ती गौशालाओं में व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित किया जाए, तो शहर में सड़कों पर उनकी संख्या कम की जा सकती है। कुछ गौशाला संचालकों ने क्षमता बढ़ाने के लिए नए शेड लगाने की संभावना भी जताई है।
गौशालाओं में विस्थापन पर जोर
जानकारों के अनुसार, जिले के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी आवारा गौवंश शहरी सीमा की ओर पहुंच रहे हैं, जिससे शहर में उनकी संख्या बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान के लिए आवारा गौवंशों को समीपवर्ती गौशालाओं में स्थानांतरित करने और वहां आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई जा रही है।
इनका कहना है
जिला मुख्यालय में आवारा गौवंशों की समस्या का कोई सार्थक निराकरण हो सके इसके लिये मैं जल्द ही चर्चा कर आवश्यक कार्ययोजना निर्धारित कराऊंगा
राकेश शुक्ला, एसडीएम गोपदबनास
