अब पढ़ाई का हिस्सा बनेंगे जंगल: छात्रों को मिलेगा सीधा मैदानी अनुभव

इंदौर: जंगल और पर्यावरण संरक्षण केवल किताबी विषय नहीं, बल्कि अब इसे प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़े जाने की तैयारी है. इंदौर वन मंडल और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के बीच लिए गए निर्णय के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत एक क्रेडिट का विशेष शैक्षणिक कोर्स शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं.डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में वन विभाग और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी.

इसके बाद डीएवीवी ने औपचारिक पत्र भेजकर वन विभाग से पाठ्यक्रम निर्माण में सहयोग मांगा. उद्देश्य साफ है जंगलों और संरक्षण कार्यों को कक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक सीख का माध्यम बनाना. प्रस्तावित कोर्स करीब 30 घंटे का होगा, जिसमें 15 घंटे कक्षा शिक्षण और 15 घंटे फील्ड विजिट शामिल रहेंगी. छात्र जंगलों की संरचना, जैव विविधता, स्थानीय और दुर्लभ प्रजातियों की जानकारी आईईटी मॉडल के साथ यह भी समझेंगे कि मिट्टी, पानी और हवा के संतुलन में वनों की क्या भूमिका है? नर्सरी में बीज संग्रह, पौध तैयार करना और रोपण की योजना को प्रत्यक्ष दिखाया जाएगा.
कोर्स में जंगल और समाज के संबंध पर भी रहेगा फोकस
डीएफओ के अनुसार, इस कोर्स में जंगल और समाज के संबंध पर भी फोकस रहेगा. छात्रों को बताया जाएगा कि ग्रामीण और शहरी जीवन किस तरह वनों पर निर्भर है और संरक्षण में समुदाय की भूमिका कितनी अहम है. साथ ही शहरी वन, इको पार्क और इको टूरिज्म की उपयोगिता पर भी जानकारी दी जाएगी. वन्यजीव और मानव के बीच होने वाले टकराव आईएचडब्ल्यूसीएम मॉडल, रेस्क्यू प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया है. इसके अलावा वनाग्नि प्रबंधन ई-फॉरेस्ट फॉयर मॉडल, आग के कारणों की पहचान और तकनीक के जरिए नुकसान कम करने के तरीकों पर भी पढ़ाया जाएगा.
इस पहल में शैक्षणिक साझेदार की भूमिका निभाएगा वन विभाग
प्रदीप मिश्रा ने बताया कि फील्ड विजिट इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत होंगी. छात्र वन नर्सरी, शहरी वन, वन्यजीव क्षेत्र और इको-पार्क का भ्रमण करेंगे. ट्रेकिंग, तितली पहचान और पक्षी अवलोकन जैसी गतिविधियों से प्रकृति के प्रति जुड़ाव बढ़ाया जाएगा. वन विभाग इस पहल में शैक्षणिक साझेदार की भूमिका निभाएगा. अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के अनुभवों से छात्रों को जमीनी स्तर की समझ मिलेगी. माना जा रहा है कि यह मॉडल शिक्षा और संरक्षण के बीच मजबूत सेतु बनेगा और छात्रों को जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करेगा.

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