नयी दिल्ली, (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है।
यहां भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा संस्थान में बुधवार को आयोजित कार्यक्रमों में कृषि शिक्षा में सुधार पर चर्चा करते हुए श्री चौहान ने सुझाव दिया कि कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू की जानी चाहिए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा।
यह जानकारी यहां एक सरकारी विज्ञप्ति में दी गयी।
श्री चौहान ने पूसा संस्थान में नए छात्रावास और शैक्षणिक भवन का भूमि पूजन और शिलान्यास भी किया। इस नए छात्रावास से 300 छात्राओं को आधुनिक और सुरक्षित रहने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में बेटियाँ कृषि शिक्षा में आगे आ रही हैं और नई पीढ़ी के नवाचार से इस क्षेत्र को एक नई दिशा मिल रही है।
एक कार्यक्रम में उन्होंने कृषि और पशुधन क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बताया। श्री चौहान ने पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरित किए और नस्ल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों, संस्थानों और पशुपालकों को सम्मानित किया। श्री चौहान ने कहा कि देशी नस्लें हमारी परंपरा और पहचान हैं और इनका संरक्षण करना हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने जैसा है। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि ऐसे समारोह जनता के बीच आयोजित हों, ताकि किसानों में प्रेरणा और गर्व की भावना बढ़े। उन्होंने मीडिया से भी अनुरोध किया कि रचनात्मक खबरों को प्राथमिकता दी जाए ताकि देश को सही प्रेरणा मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने समारोह के दौरान वैज्ञानिकों और पशुपालकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम जनता के बीच आयोजित होने चाहिए ताकि किसानों में प्रेरणा और गर्व का भाव पैदा हो। उन्होंने मीडिया से भी रचनात्मक खबरों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया। कृषि मंत्री ने जोर दिया कि पशुधन केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण जीवन की रीढ़ है जिसे और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट और आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी श्रीनिवास राव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। श्री चौहान ने अंत में आह्वान किया कि भारतीय संस्कृति, विज्ञान और आधुनिकता के संगम से ही कृषि और पशुधन क्षेत्र को सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेती अब मजबूरी नहीं, बल्कि नवाचार और अवसर का क्षेत्र है।
