मालवा-निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
प्रदेश में इस साल अप्रैल से जून के बीच राज्य सभा की तीन सीटें रिक्त होने वाली हैं. संभावित चुनाव को लेकर अभिलाषी नेताओं के प्रत्याशी बनने को लेकर दौड़-भाग शुरू हो गई है. संख्या बल को देखते हुए इनमें से 2 सीटें भाजपा को जाना तय है. एक सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी. उक्त अवधि में जो राज्य सभा से निवृतमान हो रहे हैं उन सदस्यों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह, अंचल के बड़वानी जिले के भाजपा नेता महेंद्र सिंह सोलंकी शामिल हैं. तीसरे केंद्रिय मंत्री जार्ज क्रियन हैं. इनमें से भाजपा किन्हें भेजती है, किन्हें रिपीट करती है यह अलग विषय है. मामला कांग्रेस में उलझ रहा है.
चुनावी समीकरण बैठाने वालों के अनुसार कांग्रेस इस सीट से किसी ओबीसी को राज्य सभा भेजना चाहती है. अब इसी गणित के मद्देनजर अंचल के ही दावेदार 2 नेता आमने सामने हैं. एक वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी हैं, तो दूसरे पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव हैं. अरुण यादव लंबे समय से केंद्रीय राजनीति पर नजरें लगाए हैं. प्रदेश की राजनीति में विभिन्न छत्रपों की लड़ाई का खमियाजा वे भुगतते रहे हैं.
नंदकुमार सिंह चौहान के निधन पर हुए खंडवा लोक सभा उपचुनाव से ही उन्हें प्रदेश पार्टी में अपनी उपेक्षा महसूस होती रही है.फरवरी 2024 के राज्य सभा चुनाव में भी यादव ने दिल्ली तक दौड़ लगाई थी. लगभग फायनल टिकट मान रहे यादव को तब झटका लगा था जब राज्य सभा टिकट चंबल क्षेत्र से अशोक सिंह को प्रत्याशी बना दिया गया. केंद्रीय नेतृत्व से सदा की तरह इस बार भी आश्वस्त अरुण यादव फिर मंसूबे पाले बैठें हैं. अब देखते हैं कि चाहत पूरी होती है या ठगाए जाते हैं.
पार्षद की प्रतिष्ठा को लगी ठेस
मंदसौर नगर पालिका के भाजपा पार्षद अपनी प्रतिष्ठा को लगी ठेस से इन दिनों बौखलाए हुए हैं. नगर पालिका कर्मचारियों और पार्षद प्रतिनिधि के बीच हुए विवाद का मामला थाने तक पहुंच गया और पार्षद प्रतिनिधि पर प्रकरण कायमी भी हो गई, जो पार्षद को नागवार गुजरा. इस कार्रवाई से नाराज पार्षद ने अब अधिकारियों-कर्मचारियों को निशाना बनाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मामला पार्षद एवं भाजपा जिला संयोजक विधि प्रकोष्ठ तथा सदस्य लोक निर्माण एवं स्वच्छता समिति आशीष गौड़ (एड्व्होकेट) से जुड़ा है.
गत सप्ताह नगरपालिका परिषद् मंदसौर के सहायक इंजीनीयर रोहित केथवास तथा पार्षद प्रतिनिधि विक्रम भैरवे के मध्य अचानक विवाद हो गया जिसके चलते नगरपालिका इंजीनीयर रोहित केथवास द्वारा शहर कोतवाली मंदसौर में पार्षद प्रतिनिधि विक्रम भैरवे के खिलाफ मारपीट, शासकीय कार्य में बाधा का प्रकरण दर्ज करवाया दिया था. यही नहीं घटना के अगले दिन नगरपालिका अधिकारी कर्मचारी पार्षद प्रतिनिधि द्वारा की गई घटना के विरूद्ध में लामबंद हो गये और प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप रोकने हडताल भी कर दी. इसके बाद आशीष गौड़ ने हड़ताल को मुद्दा बना लिया है.
उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि कर्मचारियों द्वारा बिना बताये हडताल पर चले जाने तथा नगरपालिका में अचानक ताला लगा दिये जाने से आमजन के कार्य प्रभावित हुए. कर्मचारियों पर शासकीय कार्य के प्रति जानबुझकर लापरवाही एवं निकाय को हानि पहुंचाने के गंभीर कदाचरण की श्रेणी होने के कारण अनुशासत्मक व दण्डात्मक कार्यवाही की जाए.
एक जांच का मुद्दा यह भी
इन दिनों इंदौर के भागीरथ पुरा का नगर निगम द्वारा आपूर्ति में दूषित जल और उससे हुई कई मौतों का मामला सुलगा हुआ है. पानी से संक्रमण कैसे फैला उसका सर्वे हो रहा है. जांच बैठाई गई है. स्थिति सम्हालने में भोपाल तक का अमला लगा हुआ है. इस हादसे का जिम्मेवार कौन है, यह तो बाद में सामने आएगा. पर सवाल यह है कि भागीरथपुरा में हादसा हो गया, लेकिन शहर भर में कई हिस्से में जलापूर्ति का शुरूआती पानी गंदा आता है.
यह समस्या वर्षों की है. इसके कारणों के पीछे चर्चा है कि पेयजल लाइन को मनमाने तरीके से कहीं भी रोका, जोड़ा जाता रहा है, ताकि कहीं किसी क्षेत्र में पानी का प्रेशर लो रहे (इसी जोड़-तोड़ से लिकेज व गंदे पानी के मिलने की संभावना अधिक रहती है). इससे उपजे जल संकट के बाद शुरू होता है टेंकरों से पानी का खेल और वारे-न्यारे होते हैं इससे जुड़े कुछ लोगों के. लोग खुला नहीं बोलते पर उम्मीद कर रहे हैं कि इसकी भी जांच हो.
