बुधनी। मां नर्मदा के तट पर इन दिनों श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है. अपनी कठोर साधना और विलक्षण योग शक्ति के लिए प्रसिद्ध सिद्ध महायोगी दादा गुरु महाराज अपनी चौथी नर्मदा परिक्रमा के दौरान रविवार शाम लगभग श्रद्धालुओं के विशाल जत्थे के साथ नगर पहुंचे.
आंवलीघाट से रवाना हुई इस पदयात्रा का मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने स्वागत किया. जैसे ही यात्रा शाम को नगर में पहुंची, पूरा नगर नर्मदे हर के जयघोष से गूंज उठा. नगरवासियों द्वारा दादा गुरु महाराज का स्वागत किया गया. रात्रि में मां नर्मदा की भव्य आरती संपन्न हुई, वहीं विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया. दादा गुरु महाराज सोमवार को दशहरा मैदान में सायं 6 बजे से 9 बजे तक भजन-कीर्तन एवं सत्संग प्रवचन देंगे. रात्रि विश्राम के पश्चात सोमवार को ही वे अपनी नर्मदा परिक्रमा यात्रा को आगे के लिए प्रस्थान करेंगे.
गौरतलब है कि 5 नवंबर को ओंकारेश्वर से प्रारंभ हुई यह नर्मदा परिक्रमा केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और पर्यावरणीय अभियान का रूप भी ले चुकी है. दादा गुरु महाराज के नेतृत्व में सभी परिक्रमावासी यात्रा मार्ग को कचरा मुक्त रखने, नर्मदा जल की शुद्धता बनाए रखने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता फैलाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
1800 दिन से निराहार, नर्मदा जल पर साधना
इस यात्रा की सबसे विशेष बात दादा गुरु महाराज की वह कठिन साधना है, जो आधुनिक विज्ञान के लिए भी आश्चर्य का विषय बनी हुई है. दादा गुरु पिछले छह वर्षों से पूर्णत: निराहार हैं. वे अन्न, फल अथवा किसी प्रकार का भोजन ग्रहण नहीं करते, बल्कि दिन में केवल एक बार मां नर्मदा का जल पीकर अपनी साधना और पदयात्रा को निरंतर जारी रखे हुए हैं.
