
बागली। कार्तिक माह में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद तुलसी की पूजा करते हुए दीपक लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। पूरे 1 महीने कार्तिक के गुजर जाने के बाद कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों के किनारे विशेष कर क्षिप्रा नर्मदा के घाट का महत्व बहुत अधिक है। जिस क्षेत्र से नर्मदा नदी निकल रही है ।उन नदियों के किनारे रहने वाले लोग एकादशी पर्व पर एवं धनतेरस पर्व पर स्नान करते हुए पुण्य लाभ लेते हैं। देवास जिले के अंतिम छोर परस्थित धारा जी घाट पर शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए और स्नान लाभ लिया। दूरस्थ क्षेत्र जावरा से आए श्रद्धालु लोकेंद्रमालवीय ने बताया कि पिपरी से धारा जी तक का मार्ग दिन प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है ।सड़क पूरी तरह खुद चुकी है। और गड्ढे बड़े बड़े हो जाने से वाहन खराब होने का डर बना रहता है। एक दिन पूर्व संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा घाट के आस पास साफ सफाई करवा दिए जाने से दुर से आये श्रद्धालुओं को घाट पर स्नान करने में सुविधा रही। मान्यता अनुसार एकादशी से भाई दूज तक सात दिवस का पर्व दीप उत्सव के रूप में मनाया जाता है। श्रद्धालुओं ने नर्मदा किनारे स्नान करने के बाद दीपदान परंपरा को निभाया।
