नई दिल्ली | 10 जनवरी, 2026: राज्यसभा की राजनीति में इस साल बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मौजूदा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल इसी साल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और सूत्रों के मुताबिक, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) उन्हें तीसरी बार उच्च सदन भेजने के पक्ष में नहीं है। हरिवंश 2018 से इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बने हुए हैं, लेकिन इस बार पार्टी ने नए चेहरों और जातिगत समीकरणों को प्राथमिकता देने का मन बनाया है। यदि हरिवंश राज्यसभा नहीं पहुँचते हैं, तो संसद के ऊपरी सदन को नया उपसभापति मिलना तय है, जिसके लिए आने वाले महीनों में चुनाव की सरगर्मी तेज हो जाएगी।
अप्रैल में बिहार की 5 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से एनडीए के खाते में 4 सीटें जाने की प्रबल संभावना है। जदयू की रणनीति के अनुसार, वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को दोबारा सदन भेजा जा सकता है, ताकि मोदी सरकार में उनका मंत्री पद बरकरार रहे। हालांकि, हरिवंश के मामले में नीतीश कुमार की बेरुखी साफ नजर आ रही है। जानकारों का मानना है कि 2022 में जब नीतीश ने महागठबंधन का दामन थामा था, तब हरिवंश द्वारा उपसभापति पद से इस्तीफा न देने के फैसले ने दोनों के रिश्तों में स्थायी खटास पैदा कर दी थी।
जदयू के भीतर से आ रही खबरों के अनुसार, पार्टी का स्पष्ट मानना है कि हरिवंश को दो कार्यकाल मिल चुके हैं और अब संगठन को नए रक्त की आवश्यकता है। उपसभापति पद को लेकर जदयू नेताओं का कहना है कि यह निर्णय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को लेना है कि सदन का अगला संचालन कौन करेगा। संवैधानिक पद होने के नाते बीजेपी इस पर किसी नए सहयोगी या अपने वरिष्ठ नेता को मौका दे सकती है। फिलहाल, नीतीश कुमार के इस संभावित कदम ने बिहार से लेकर दिल्ली तक की सियासी बिसात पर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

