इंदौर: भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से अब तक करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं. दूषित पानी से बीमारी फैलने की यह घटना किसी एक वार्ड तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे इंदौर शहर के साथ ही प्रदेशभर में है. साथ ही यह गंभीर समस्य वर्षों से चली आ रही है.भगीरथपुरा की घटना ने नगर निगम की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल दी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में लंबे समय से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हुआ है.
सवाल यह भी उठ रहा है कि अब तक नगर निगम कितने लाख गैलन दूषित पानी शहरवासियों को पिला चुका है. चिंताजनक तथ्य यह है कि पिछले करीब 15 वर्षों में पेट दर्द, डायरिया और जलजनित बीमारियों से कई मौतें हो चुकी हैं, जिनका सीधा संबंध दूषित पेयजल से हो सकता है, लेकिन इन मामलों की गंभीर जांच कभी नहीं हुई. भागीरथपुरा की घटना के बाद नागरिकों में आक्रोश है और लोग दोषियों पर कार्रवाई तथा स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल आपूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है.
यह बोले नागरिक
जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, वह तो कुछ समय पूर्व ही आए थे. इस घटना के जिम्मेदार तो समय-समय के महापौर, क्षेत्र के पार्षद और वार्ड मंत्री होते हैं. भ्रष्टाचार करते हुए पूरे इंदौर में घटिया मलिटी के पाइप डाले गए हैं. जो हर कहीं से लीकेज हो रहे हैं.
– राहुल निहोरे, समाजसेवी
स्वच्छता अभियान में पेच वर्क लगाकर हमने देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा तो हासिल कर लिया, लेकिन आम जनता जो बस्तियों और चालों में रहती हैं, उनके लिए कोई सुविधाएं नहीं जुटाईं. सीवरेज, पेयजल सुविधा सही कीजिए.
– संजीव वैध, सिविल सेवा मार्गदर्शक
बैग भरकर पैसे देकर बाहर से यहां पोस्टिंग कराकर आए अधिकारियों ने निगम को चारागाह समझ रखा है. ठेकेदार बनकर भ्रष्टाचार करते हैं, हमने लिखित में दिया है. स्थानीय शिक्षित एवं अनुभवी अधिकारियों का प्रमोशन किया जाए.
– महेश गौहर, कर्मचारी नेता, नगर निगम, इन्दौर
