
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में बालिग युवती को नाबालिग बताकर आरोपी को दी गई उम्रकैद की सजा को गंभीर भूल बताकर खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की युगलपीठ ने आरोपी को दोषमुक्त करते हुए कहा कि लडक़ी बालिग थी और एक्स-रे रिपोर्ट में भी उसकी उम्र 18 साल से ज्यादा बताई गई। इसके बावजूद भी आरोपी को तीन साल तक जेल में रखकर उसके साथ अन्याय किया गया। न्यायालय ने मामले में महिला जज व सरकारी वकील को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण चेम्बर में पेश करने के निर्देश दिये है, ताकि उस पर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिये जा सकें।
दरअसल यह मामला पनागर थानांतर्गत ग्राम तिलगवां में रहने वाले रवि कोल की अपील से संबंधित है। एक नाबालिग के दुष्कर्म करने के आरोप में आरोपी को जबलपुर की विशेष न्यायाधीश बरखा दिनकर की अदालत ने 30 नवम्बर 2023 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। रवि कोल पर आरोप था कि शादी का लालच देकर उसने एक नाबालिग लडक़ी का अपहरण करके उसके साथ दुष्कर्म किया। पीडि़ता की मां की शिकायत पर 31 जनवरी 2022 को माढ़ोताल थाने में प्रकरण दर्ज हुआ था। पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि पीडि़ता बालिग थी, लेकिन नाबालिग मानकर आरोपी को उक्त सजा दी गई, जबकि मामला आपसी सहमति से बने संबंधों का है, जहां आरोपी को सजा नहीं होनी थी।
