जिएं हर कदम सांसों के साथ:

हर सांस में खुशी का पल जिएं

हर सांस में खुशी का पल जिएं

 

दैनिक कार्यों को करते हुए अपनी सांसों पर ध्यान
श्वास प्रवास का मुख्य द्वार नासिका है यह नासिका छिद्रों के द्वारा आता जाता है। श्वास लेना व श्वास छोड़ना जीवन का आधार है। हमारा शरीर इंद्रियां मन एवं बुद्धि सभी तब तक सक्रिय हैं जब तक श्वास चल रही है । आई आज हम अपने दैनिक कार्यों को करते हुए सांसों पर ध्यान देना सीखते हैं यह एक बहुत ही सरल और प्रभावी तरीका है और सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको अलग से समय नहीं देना अपने दैनिक कार्यों को करते हुए सांसों के प्रति सजगता या जागरूकता को बढ़ाना है।

सांसों का साक्षी बनना
सहजता से सांसों को देखना है अपने दैनिक कार्यों को करते समय सजाकता से देखें की सांस अंदर जा रही है सांस बाहर आ रही है उसे लंबा या छोटा गहरा या धीमा करने का प्रयास न करें बस कार्यों को करते हुए सांसों के प्रति साक्षी बने रहे।

सांसों को कार्यों से जोड़ें
अपने प्रत्येक कार्य को सांसों से जोड़ना है जैसे जितने भी शारीरिक स्थिति को झुकने वाले कार्य आए या जब भी झुके साथ छोड़ना है इस बात को याद कर लेना है कि हमें जब भी झुकने वाले कार्य करना है सांसों को छोड़ना है और जब उठे तो सांसों को लेना है। झुकते समय सांस बाहर जा रही है उठते समय सांस अंदर जा रही है शुरुआत में आशाए लग सकता है लेकिन जैसे-जैसे आप सांसों के प्रति सजगता बढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे आपके जीवन में चमत्कारी परिवर्तन आएंगे।

रोज़मर्रा की गतिविधियों में श्वास की अनुभूति
अत: अपने हर काम को स्वास्थ्य से जोड़ दें अपनी कदमताल को सांस से जोड़ दें, चलते हुए सांसों का अनुभव करें सीढ़ियां चढ़ते हुए सांसों पर एकाग्रता बनाएं बर्तन धोते समय पानी की ध्वनि के साथ अपनी सांसों को महसूस करें भोजन बनाते समय मसाले आदि से उत्पन्न खुशबू को स्वास्थ्य से जोड़ दें पानी पीते हुए एक घूंट पानी का श्वास के साथ आनंद लें।

कार्यों के बीच छोटा विश्राम
काम के बीच में थोड़ा विश्राम भी दें एक काम पूरा हुआ 15 20 सेकंड रुक सांसों के प्रति साक्षी रहे मन ही मन कहे श्वास अंदर जा रहा है। यह अभ्यास बड़ा ही चमत्कारिक है इस अभ्यास को दिन में कई बार करना है।

तनाव की स्थिति में श्वास का सहारा
जब भी कोई बड़ा निर्णय लेना हो पहले लंबी गहरी सांस ले पांच सात बार फिर निर्णय लें,मन में भटकाव सा अनुभव हो रहा हो तुरंत सांसों के प्रति साक्षी हो जाएं अर्थात किसी भी प्रकार का तनाव दबाव समस्या की स्थिति में सांसों के प्रति साक्षी बन जाना है सांसों पर ध्यान के लिए छोटे-छोटे संकेत बड़े काम आते हैं,

ऑफिस में श्वास पर ध्यान
ऑफिस में भी आप अपने सांसों पर ध्यान दे सकते हैं। चेयर पर बैठते ही अच्छी लंबी श्वास लें और धीरे-धीरे छोड़ें, माउस को छूने से पहले सांसों के प्रति सजग, कंप्यूटर स्क्रीन को देखते समय सांसों पर ध्यान, कार्य पूर्ण हो जाने के पश्चात फिर लंबी गहरी सांस लें और छोड़ें। ऐसा करने से काम करते हुए आप थकेंगे नहीं बल्कि आपको एनर्जी ऊर्जा और उत्साह मिलेगा, यह सहज सांस का जो पथ है यह बड़ा ही अद्भुत है जैसे-जैसे आप इसमें गोते लगाते जाएंगे वैसे-वैसे आप अपने मूल स्वरूप से जुड़ते चले जाएंगे।

श्वास—एक अद्भुत विज्ञान
यह सांसों का अद्भुत विज्ञान है मात्र मुंह और नासिका के माध्यम से ही सांस अंदर नहीं जाती है, शरीर के करोड़ों रोम कूप के माध्यम से भी श्वास अंदर जाती है करोड़ों अरवो छिद्रों के माध्यम से श्वास अंदर जाती है आपको विशालता का अनुभव कराती है और जब सांस बाहर जाती है तो आपको रूई सा हल्कापन देती है।

योग का अर्थ—श्वास से जुड़ना
यह सब संभव है मात्र आवश्यकता है तो आपका सांसों के साथ जुड़ना, क्योंकि जुड़ने का नाम ही योग है आप जितनी श्रद्धा के साथ सांसों के साथ जुड़ेंगे उतना ही आपको लाभ होने वाला है।

श्वास से सहज जुड़ाव का अभ्यास
सांसों के साथ एक सहज जुड़ाव बनायें, यह छोटे-छोटे अभ्यास आपको सांसों के साथ सार्वभौमिक करेंगे। यदि समय मिले तो सुबह कुछ प्राणायाम का अभ्यास भी करें शाम को सोने से पहले कुछ प्राणायाम का अभ्यास करें। आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपका जीवन पूरी तरह से रूपांतरित हो जाएगा

 

एक मिनट में कितनी बार सांस लें

वैसे तो ऐसा कोई नियम नहीं है कि एक मिनट में कितनी बार सांस लेना चाहिए लेकिन मोटे तौर पर एक सांस 4 पल्स रेट के बराबर होती है। यानी किसी भी नॉर्मल शख्स का पल्स रेट एक मिनट में करीब 72 होता है। ऐसे में उसकी सांस एक मिनट में 15-18 हो सकती है। हालांकि खिलाड़ी या ज्यादा फिजिकल मेहनत करने वाले लोगों में यह संख्या 12-13 भी हो सकती है। खिलाड़ियों की सांस और पल्स कम होती हैं जबकि मोटे लोगों की ज्यादा। इसकी वजह यह है कि खिलाड़ी या जिम जाने वाले लोग रेग्युलर तौर पर फिजिकल एक्सरसाइज ज्यादा करते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनका पल्स रेट कम हो जाता है। इसका फायदा यह होता है कि हमारे हार्ट को काम कम करना पड़ता है। इससे जरूरत के वक्त के लिए हार्ट के पास रिजर्व में एनर्जी बची रहती है। अगर किसी की सांस दर 12 से कम और 25 से ज्यादा है तो वह खतरनाक हो सकता है। हालांकि बुजुर्गों (65 साल से ज्यादा) में एक मिनट में 12 से 28 तक सांस नॉर्मल हैं।

तेज सांस लेने के नुकसान

– कम मात्रा में ऑक्सिजन शरीर में जाने से तनाव, पैनिक अटैक, अस्थमा, निमोनिया जैसी समस्याओं की आशंका
– हार्ट रेट का बढ़ना
– सांस का अटकना या सांस लेने में रुकावट होना
– मसल्स में क्रैंप्स पड़ना यानी अकड़न होना
– ब्लड प्रेशर का बढ़ना
– हीट और साउंड एनर्जी से पलूशन फैलना
– शरीर पर फालतू तनाव पड़ना
– ऑक्सिजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान ढंग से नहीं हो पाना

धीमी और गहरी सांस लेने के फायदे

– दिल और फेफड़ों की गतिविधियां बेहतर होना। ब्लड प्रेशर कम होना।
– एंडॉर्फिन हॉर्मोंस निकलना, जो पेनकिलर का काम करते हैं।
– खून का दौरा बेहतर होना, जिससे शरीर से टॉक्सिंस यानी जहरीले तत्व निकलते हैं।
– शरीर में ज्यादा ऑक्सिजन का जाना, जिससे एनर्जी लेवल बेहतर होता है।
– मन का शांत होना, गुस्सा और एंग्जाइटी कम होना।
– शरीर में एल्कलाइन लेवल बेहतर होना।
– मन पर बेहतर कंट्रोल होना।
– कंसंट्रेशन और मेमरी का भी अच्छी होना।
– नर्वस सिस्टम का बेहतर होना।
– पाचन अच्छा होना।
– पॉश्चर का सुधरना।

 

योगाचार्य राम नरेश रघुवंशी

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