इंदौर: महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पुराने वार्ड क्रमांक 70 की बस्तियों में भागीरथपुरा की दहशत बनी हुई है. इस वार्ड की बस्तियों में लम्बे समय से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है. इन बस्तियों में यद्यपि एक दिन छोड़कर जलप्रदाय होता है और वो भी दूषित पेयजल के साथ. यहां के नागरिक नगर निगम में कई बार शिकायत कर चुके हैं, मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. बार-बार शिकायत के बाद सिर्फ आश्वासन मिलता है, लीकेज और ड्रेनेज लाइनों को सुधारने कोई नहीं आ रहा है.
महापौर पुष्यमित्र भार्गव का पैदाइशी इलाका इन दिनों दूषित पेयजल और जलसंकट से जूझ रहा है. विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 4 का वार्ड क्रमांक 70, जो कि महापौर का पूर्व में निवास क्षेत्र रहा है. उनके वार्ड में राज मोहल्ला और चंदन नगर स्थित पानी की टंकी से जल प्रदाय होता है. इस क्षेत्र की पेयजल पाइप लाइन कई जगह से लीकेज होने के कारण इसमें ड्रेनेज का दूषित एवं बदबूदार पानी मिल रहा है. यहां के नागरिक लम्बे अरसे से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. गौरतलब है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव पूर्व में धार रोड के गडरिया मोहल्ले में निवास करते थे. धार रोड पर जिला अस्पताल के पास ही इनके पिताजी का क्लीनिक भी मौजूद है.
10-15 मिनट ही साफ पानी
पश्चिम क्षेत्र में पेयजल वितरण राजमोहल्ला और चंदन नगर की टंकी से होता है. इनमें सबसे ज्यादा दूषित पानी राजमोहल्ला की टंकी से प्रदाय हो रहा है. इस टंकी से आदर्श इंदिरा नगर, हरिजन कालोनी, चांदमारी ईंट भट्टा, लोक नायक नगर, गडरिया मोहल्ला, लाबरिया भेरू में जल वितरण किया जाता है. प्रातः साढ़े छह बजे से होने वाला जल प्रदाय में अधिकांश समय गंदा एवं बदबूदार पानी ही आता है. नल बंद होने के समय दस से पंद्रह मिनट ही साफ पानी आता है. अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी भी दिन यहां भागीरथपुरा की पुनरावृत्ति हो सकती है.
क्या कहते हैं वार्ड 70 के बाशिंदे-
वार्ड 70 की बस्ती चांदमारी ईंट भट्टा की रहवासी श्रीमती लक्ष्मी यादव का कहना है कि उनके यहां के नल में पिछले दो साल से गंदा और काला पानी आ रहा है, इसलिए वे तो ये यहां का पानी पीते ही नहीं है. पीने के पानी का इंतजाम वे दूसरी जगह से करते हैं. नियमित जलकर और संपत्तिकर भरने के बाद दो साल से बाहर से लाकर पेयजल की व्यवस्था कर रहे हैं. उनका कहना है कि नगर निगम के अधिकारी इधर आते ही नहीं और अगर आए जाए तो भी उनकी कोई सुनता नहीं.
– चांदमारी ईंट भट्टा की एक अन्य रहवासी श्रीमती हेमलता कैथवास का कहना है कि नलों में गटर का पानी आता है, जो कि नल खोलने पर बासता है. एकाध घंटे जलप्रदाय के दौरान प्रारंभ में आधा घंटा तक को बदबूदार पानी ही आता है. इसलिए इस पानी को भरकर उलीचना पड़ता है, ताकि पांच दिस मिनट में साफ पानी के दर्शन हो सके. इससे दिनभर के लिए पानी की आपूर्ति भी नहीं हो पाती है. पीने के पानी का इंतजाम इधर-उधर से करना पड़ता है. ये ऐसा पानी है, जिसे जानवर भी नहीं पीए. इस गंदे पानी के कारण यहां जलसंकट बना हुआ है.
– धार रोड की अन्य बस्ती गडरिया मोहल्ले में काका की गली में रहने वाली अजीत कौर अपने घर के बाहर पानी फेंकते हुए दिखाई दी. जब उनसे पूछा गया कि आप पानी व्यर्थ में क्यों बहा रही हो तो उनका जवाब था- भइया ये तो जहर है. पूरी तरह काला है, आप भी देख लो. शुद्ध पानी के इंतजार में नल से प्रदाय पानी को तब तक बाहर फेंकना पड़ता है, जब तक कि नल से साफ पानी न आ जाए. यह साफ पानी पांच दस मिनट बमुश्किल आता है और नल बंद हो जाता है. यह पानी इतना गंदा है कि कोई इसके पास खड़ा रहने पसंद नहीं करें, मगर पेयजल के लिए इसे उलीचना पड़ता है.
– गडरिया मोहल्ले के अशोक परमार ने भी अपने यहां बाल्टी में भरा गंदा पानी दिखाया. उन्होने कहा कि चंदन नगर पानी की टंकी पर जाकर कई दफा शिकायत कर चुका हूं, मगर कोई सुनता ही नहीं. नगर निगम के अधिकारी भी इधर ध्यान नहीं दे रहे हैं. पेयजल की पाइप लाइन कहीं से लीकेज होने के कारण इसमें गटर का पानी मिल रहा है. एक घंटे तक गंदा पानी उलीचने के बाद थोड़ी देर साफ पानी आता है और नल बंद हो जाता है. लम्बे समय से यहां इस तरह का जलसंकट बना हुआ है.
– गडरिया मोहल्ले के एक अन्य रहवासी कमल चौहान ने कहा कि उनके यहां के नल में लगभग दो साल से गंदा पानी आ रहा है. निगम के अधिकारियों से शिकायत की थी, तब उन्होंने कहा था कि कहीं से लाइन लीकेज हो रही है. लाइन को जल्द ही सुधार दिया जाएगा, मगर अभी तक तो लाइन नहीं सुधारी गई है. ड्रेनेज लाइन का पानी पेयजल की पाइप लाइन में मिलने के कारण दूषित पेयजल से जूझना पड़ रहा है
