इंदौर:भागीरथपुरा की घटना को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी पानी दूषित होने का स्थान और प्वाइंट का पता नहीं लगा पाए है. इससे समझा जा सकता है कि नगर निगम के अधिकारियों को नर्मदा लाइन की पूरी जानकारी ही नहीं है. निगम में सिर्फ लाइन बिछाने का काम किया जाता है, लेकिन लाइन के पास कहां से ड्रेनेज लाइन क्रॉस हो रही है, कहां से ड्रेनेज चेंबर और गंदा पानी मिक्स हो सकता है? इसका ध्यान नहीं रखा जाता है.
28 दिसंबर से भागीरथपुरा में जहरीले पानी से लोगों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ है. हजारों लोगों के बीमार पड़ने की जानकारी रोज आ रही है. बताया जा रहा है कि गंदा पानी आने की शिकायत क्षेत्र के रहवासी पिछले दो सालों से कर रहे थे. इतना ही नहीं पिछले दो महीनों से लगातार पार्षद से लेकर निगम 311 एप पर शिकायत की जा रही थी. इसे यूं समझा जा सकता है कि शिकायत पर संज्ञान लेना अधिकारी और नेताओं को जरूरी नहीं लगता है. यही कारण है कि क्षेत्र में लगातार दूषित पानी सप्लाय जारी रहा और निगम अधिकारियों से लेकर पार्षद, जनप्रतिनिधियों के कान में जूं तक नहीं रेंगी. अब जब मौत और बीमार होने का भयावह आंकड़ा पार हो गया है. पूरे देश और प्रदेश में किरकिरी हुई, तो सबकी नींद खुली, मगर तब तक देर हो गई.
