नयी दिल्ली, 02 जनवरी (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने हाल ही में अर्पित राठौर के परिसर में तलाशी अभियान चलाया, जिसे एसपी ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट मामले से संबंधित धनशोधन जांच मामले में तलाशी के दौरान गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि तलाशी के दौरान आपत्तिजनक रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और 14 लाख रुपये नकदी जब्त की गयी। ईडी ने लुधियाना के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में बीएनएसएस, 2023 के अंतर्गत दर्ज एफआईआर के आधार पर पीएमएलए जांच शुरू की। इसी समूह से संबंधित साइबर अपराध या डिजिटल गिरफ्तारी के नौ अतिरिक्त एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया। ईडी की जांच में पता चला कि एसपी ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट के दौरान, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों का रूप धारण करने वाले धोखेबाजों ने उनसे सात करोड़ रुपये की उगाही की। इसी गिरोह ने इसी तरह की डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी के जरिए अन्य लोगों से 1.73 करोड़ रुपये की ठगी की।
जांच में पता चला कि अवैध धनराशि को आरोपी रूमी कलिता और अर्पित राठौर द्वारा संचालित कई गुप्त खातों के माध्यम से भेजा गया। गुवाहाटी की रहने वाली कलिता और कानपुर के रहने वाले राठौर इन गतिविधियों में शामिल हैं। यह भी पता चला कि कलिता अतानु चौधरी के साथ मिलकर काम करती थी और उनकी कंपनी, मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स, और एक अन्य कंपनी, रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों का उपयोग अवैध धन को वैध बनाने के लिए करती थी। नौ डिजिटल अरेस्ट मामलों से प्राप्त धनराशि फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खातों में जमा की गई जबकि दो मामलों से प्राप्त धनराशि रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खाते में रखी गई। बाद में इन राशियों को 200 से अधिक गुप्त बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया जिससे धनराशि का दुरुपयोग आसान हो गया। पीड़ितों द्वारा राशि जमा करने के बाद, अर्पित राठौर ने रूमी कलिता को धनराशि स्थानांतरित करने का निर्देश देकर इन लेन-देनों को संभव बनाया।
जांच में यह भी पता चला कि अर्पित राठौर ने एसपी ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट में ही नहीं बल्कि निर्दोष लोगों को निशाना बनाने वाले कई अन्य साइबर अपराधों एवं धोखाधड़ी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राठौर ने इन अपराधों को अंजाम देने के लिए विदेशी सहयोगियों से संपर्क बनाए रखा, विदेशी नागरिकों को फर्जी खाते मुहैया कराकर और अवैध धन को विदेशी न्यायालयों में स्थानांतरित करने में सहायता प्रदान की। इसके बदले में, इन विदेशी नागरिकों ने राठौर को मुआवज़ा दिया और साइबर अपराध से कमाए गए मुनाफे को विदेश भेजने में मदद करने के लिए उन खातों की जानकारी हासिल की, जिनमें डेटा ट्रांसफर का काम होता था। यह भी पता चला कि राठौर को आपराधिक कमाई का अपना हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी और भारतीय रुपये के रूप में मिला था। इससे पहले, इस मामले में तलाशी अभियान चलाया गया था और आरोपी रूमी कलिता को गिरफ्तार किया गया था। वह ईडी की हिरासत में है। आरोपी अर्पित राठौर भी पांच जनवरी तक ईडी की हिरासत में है। मामले की जांच जारी है।

