ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
विगत कुछ माह से प्रतिपक्ष के साथ सत्तापक्ष की ओर से भी सार्वजनिक मंचों से खुलकर इस बात पर नाराजगी जताई जाती रही है कि विकास की दौड़ में प्रदेश के अन्य महानगरों की तुलना में ग्वालियर काफी पिछड़ गया है जबकि इस शहर से सशक्त राजनीतिक नेतृत्व प्रदेश की सत्ता में प्रभावी है। खुद सिंधिया खेमे के मंत्री 1956 में मप्र के गठन के दौर की याद करते हुए कहते रहे हैं कि तब प्रदेश के चारों राजभोगी शहरों में विकास से जुड़े हर मामले में ग्वालियर आगे था लेकिन आज अपने इन प्रतिस्पर्धी शहरों की तुलना में काफी पिछड़ गया है।
अब लगता है कि प्रदेश में दो वर्ष से सत्तारूढ़ मोहन यादव सरकार ग्वालियर के मामले में गंभीर है और इस ऐतिहासिक शहर का वही सत्तर साल पुराना वैभव लौटाने के उपक्रम में जुटी है। अटलजी की जयंती पर अभ्युदय एमपी ग्रोथ समिट के राज्यस्तरीय आयोजन के लिए ग्वालियर के चयन से यही जाहिर होता है। समिट के दौरान दो लाख करोड़ की प्रस्तावित एवं प्रगतिशील औद्योगिक इकाईयों का भूमि-पूजन, मुकम्मल हो चुके प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण, निवेश प्रस्तावों से जुड़े लाभार्थियों का सम्मान तथा रोजगार-केंद्रित पहलों का प्रजेंटेशन तो हुआ ही, उम्मीद बढ़ी है कि यह मंच सरकार, उद्योग जगत और युवाओं के मध्य संवाद को सशक्त बनाते हुए भविष्य में ग्वालियर चंबल में निवेश को गति और रोजगार को स्थायित्व भी प्रदान करेगा।
मोहन यादव के सीएम बनने के बाद से ग्वालियर में दो महत्वपूर्ण बिजनेस कॉन्क्लेव हुए हैं, अगस्त 2024 में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और अगस्त 2025 में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव प्रमुख हैं, जहाँ इस क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक विकास पर चर्चा हुई थी, लगभग 3500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए थे, ग्वालियर चंबल को प्रदेश के नए पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने का भी सिला बना। आज हुई अभ्युदय एमपी ग्रोथ समिट से भी कुछ ऐसी ही उम्मीदें ग्वालियरवासियों ने लगा रखी थीं। कह सकते हैं कि काल के कपाल पर आज जो इबारत लिखी गई है, वह खुशनुमा नतीजों के साथ जल्द ही अंजाम तक पहुंचेगी।
ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी होते ही कांग्रेस में पड़ गई फूट
प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल का दौर चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने दो साल के कार्यकाल के अंतिम दिनों में 780 नए ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी की, जिसका उद्देश्य पार्टी को मजबूत बनाना बताया गया लेकिन सूची जारी होते ही ग्वालियर चंबल क्षेत्र के तमाम जिलों में असंतोष सामने आया। यहां पार्टी के पुराने गुटों के बीच तनातनी फिर तेज हो गई।
जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय और कमलनाथ के बीच लंबे समय से गुटबाजी चली आ रही है और ब्लॉक स्तर की नियुक्तियां इस गुटबाजी का नया केंद्र बनी हैं। इसी गुटबाजी का नतीजा है कि ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी होते ही उस वक्त ग्वालियर में कांग्रेस झटका लगा जब बैरजा मंडल के अध्यक्ष केदार कौशल ने पद लेने से ही इंकार कर दिया। कुछ और विधानसभा क्षेत्रों में भी ऐसे ही हालात बने, जाहिर है कि इससे पार्टी में चिंता है। हालांकि पार्टी के नेताओं ने इस मामले पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन बेरजा ब्लॉक के नए अध्यक्ष द्वारा पद ठुकराने से संगठन में अंदरूनी तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।
चुनाव से डेढ़ साल पहले प्रभारी मंत्री ने पार्षदों को दी ताकत
ग्वालियर निगम के चुनाव में अब सिर्फ डेढ़ वर्ष बचा है। साढ़े तीन वर्ष तक अपनी हालत सुधारने में व्यस्त रहे पार्षदों को एकाएक अपने क्षेत्र की चिन्ता गहरा गई है। प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट ने भाजपा पार्षद दल की खास बैठक बुलाई तो सत्तारूढ़ दल के पार्षदों की चिंताएं और असंतोष खुलकर सामने आया। ज्यादातर पार्षदों की यही शिकायत थी कि उनके वार्ड में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं, ऐसी सूरत में वे महज डेढ़ बरस बाद अपने वोटरों को किस तरह फेस करेंगे। शिकवा शिकायत सुनने के बाद प्रभारी मंत्री ने यह ऐलान कर अपनी पार्टी ही नहीं बल्कि कांग्रेस के पार्षदों को भी खुश कर दिया कि ग्वालियर निगम में सभी वार्डों में दो दो करोड़ के विकास कार्य कराएंगे और यह काम पार्षदों का कार्यकाल खत्म होने के पहले ही करा लिए जाएंगे।
प्रभारी मंत्री ने पार्षदों को इंदौर घुमाने और सीएम से मुलाकात कराने का भी वादा किया है। बहरहाल, ग्वालियर नगर निगम के आगामी चुनाव कांग्रेस के लिए भी अग्निपरीक्षा होंगे। करीब पचपन साल के लंबे इंतजार के बाद महापौर का चुनाव जीतकर ग्वालियर नगर निगम पर कांग्रेस ने अपना परचम फहराया था लेकिन सदन में बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस अपना सभापति नहीं चुनवा सकी। परिषद में महापौर कांग्रेस की हैं तो सभापति भाजपा के हैं। जाहिर है कि ग्वालियर नगर निगम में दो पावर सेंटर हैं, पार्षदों का कहना है कि इस राजनीतिक टकराव का असर उनके वार्डों के विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है।
सिंधिया को राजा साहब की पदवी
ज्योतिरादित्य सिंधिया को तत्कालीन ग्वालियर रियासत की परंपरा में महाराज की पदवी प्राप्त है। इस पदवी की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भले ही कोई प्रासंगिकता न हो लेकिन आज एमपी ग्रोथ समिट में अमित शाह ने अपने भाषण के आरंभ में सिंधिया को राजा साहब कहकर भाजपा में उनके कद को और ऊंचा कर दिया, वह भी तब जबकि स्थानीय पार्टी संगठन में उनका नरेन्द्र सिंह तोमर से कोल्डवार चल रहा है।
